नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वर्ष 2023 की मणिपुर हिंसा से पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को जोड़ने वाली कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग में छेड़छाड़ की गई है और इसे विश्वसनीय साक्ष्य नहीं माना जा सकता। केंद्र ने यह दलील राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू), गांधीनगर की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट के आधार पर दी।
यह मामला न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। याचिका कुकी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट द्वारा दायर की गई है, जिसमें कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग की न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने एनएफएसयू की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिकॉर्डिंग में कई स्थानों पर संपादन और बदलाव के स्पष्ट संकेत मिले हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता द्वारा बाद में प्रस्तुत दो घंटे से अधिक अवधि वाली विस्तारित ऑडियो रिकॉर्डिंग में भी अनेक कट, संपादन और भिन्नताएं पाई गई हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि रिकॉर्डिंग से छेड़छाड़ की गई है। इन निष्कर्षों के आधार पर केंद्र ने याचिका को लागत के साथ खारिज करने की मांग की।
याचिका का आधार एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के कथित रूप से मणिपुर की जातीय हिंसा को बढ़ावा देने तथा हिंसा के दौरान हथियारों की लूट में शामिल लोगों को संरक्षण देने की बात स्वीकार करने का दावा किया गया है। प्रारंभ में याचिकाकर्ता ने लगभग 48 मिनट की रिकॉर्डिंग प्रस्तुत की थी, जिसके बाद दो घंटे से अधिक अवधि की विस्तृत रिकॉर्डिंग भी अदालत के समक्ष रखी गई।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने छोटी रिकॉर्डिंग के अधूरी प्रतीत होने पर चिंता व्यक्त करते हुए एनएफएसयू को पूरी रिकॉर्डिंग की फोरेंसिक जांच करने का निर्देश दिया था। विश्वविद्यालय को यह जांच करने के लिए कहा गया था कि क्या रिकॉर्डिंग में संपादन या छेड़छाड़ की गई है तथा क्या रिकॉर्डिंग में सुनाई देने वाली आवाज पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के स्वीकृत वॉयस सैंपल से मेल खाती है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने ट्रुथ लैब्स की पूर्व फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला दिया। उस रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि रिकॉर्डिंग में सुनाई देने वाली आवाज के बीरेन सिंह की होने की प्रबल संभावना है। उन्होंने अदालत से इस रिपोर्ट पर भी विचार करने का आग्रह किया।
एनएफएसयू की रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 30 जुलाई 2026 की छह पृष्ठों वाली फोरेंसिक रिपोर्ट की प्रतियां याचिकाकर्ता और केंद्र सरकार दोनों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि दोनों पक्षों को रिपोर्ट का अध्ययन करने और उसके निष्कर्षों पर अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए ताकि किसी भी पक्ष को आश्चर्य का सामना न करना पड़े।
मामले की सुनवाई फिलहाल स्थगित कर दी गई है। अब सुप्रीम कोर्ट एनएफएसयू और ट्रुथ लैब्स की परस्पर विरोधी फोरेंसिक रिपोर्टों का परीक्षण करने के बाद यह तय करेगा कि कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका में आगे क्या कार्रवाई की जाए।
