छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अनिवार्य शपथपत्र और ₹250 शुल्क के बिना लोक आयोग की शिकायत अमान्य

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी लोक सेवक के खिलाफ शिकायत के आधार पर छत्तीसगढ़ लोक आयोग में कार्रवाई शुरू की जाती है, तो शिकायत के साथ कानून के अनुसार शपथपत्र और ₹250 की अनिवार्य जमा राशि होना जरूरी है। इन अनिवार्य शर्तों का पालन किए बिना लोक आयोग आगे की कार्रवाई नहीं कर सकता।

न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ ने डॉ. शिव शंकर अग्रवाल की याचिका स्वीकार करते हुए लोक आयोग के 17/18 नवंबर 2020 के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही उनके विरुद्ध दर्ज शिकायत को भी निरस्त कर दिया।

अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता ने लिखित शिकायत दी थी, लेकिन उसके साथ न तो अधिनियम के अनुसार शपथपत्र लगाया गया था और न ही ₹250 की अनिवार्य राशि जमा की गई थी। बाद में लोक आयोग ने इसे “विशिष्ट सूचना” बताकर कार्रवाई जारी रखने का प्रयास किया, जिसे हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड के विपरीत और कानून के अनुरूप नहीं माना।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि “जब किसी कार्य को करने का तरीका कानून में निर्धारित है, तो उसका पालन उसी प्रकार करना अनिवार्य है।” अदालत ने यह भी माना कि छत्तीसगढ़ लोक आयोग अधिनियम, 2002 की धारा 8(1) के तहत शपथपत्र और ₹250 की जमा राशि अनिवार्य है तथा इनके अभाव में शिकायत पर आगे की कार्रवाई नहीं की जा सकती।