सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी के फ्रीज बैंक खातों से सीमित राशि जारी करने की संभावना टटोली, ईडी से मांगा जवाब

Supreme Court of India

कोलकाता हाईकोर्ट में सुनवाई लंबित रहने तक दैनिक खर्चों के लिए अंतरिम व्यवस्था पर विचार, 11 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के फ्रीज किए गए बैंक खातों से दैनिक और आवश्यक खर्चों के लिए सीमित राशि जारी करने की संभावना पर विचार किया। न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से पूछा कि क्या कोलकाता हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी, सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुब्रत तालुकदार के माध्यम से पार्टी को एक उचित राशि अंतरिम रूप से उपलब्ध कराई जा सकती है।

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि टीएमसी की याचिका 20 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट में सूचीबद्ध है। ऐसे में दोनों पक्ष हाईकोर्ट में मामले के शीघ्र निस्तारण में सहयोग करें। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को निर्धारित की है।

टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मेनका गुरुस्वामी ने दलील दी कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईडी द्वारा पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज करना मनमाना और अनुपातहीन कदम है। सिब्बल ने कहा कि ईडी का आरोप है कि लगभग 160 करोड़ रुपये इन खातों के माध्यम से स्थानांतरित हुए, लेकिन एजेंसी ने उससे कहीं अधिक राशि वाले खातों को फ्रीज कर दिया है।

उन्होंने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने यह मान लिया था कि लगभग 164 करोड़ रुपये वाले 36 अन्य बैंक खाते अभी भी संचालित हो रहे हैं, जबकि वास्तव में उन खातों पर भी डेबिट फ्रीज लगाया जा चुका है। इसके कारण पार्टी अपने कर्मचारियों के वेतन सहित सामान्य प्रशासनिक और दैनिक खर्च भी नहीं उठा पा रही है।

कपिल सिब्बल ने यह तर्क भी रखा कि यदि ईडी का आरोप है कि कथित अपराध की आय एक खाते से दूसरे खाते में स्थानांतरित हुई है, तो केवल इस आधार पर मूल खाते को ही फ्रीज करना उचित नहीं ठहराया जा सकता।

ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि पीएमएलए ईडी को कथित धन शोधन की प्रक्रिया को रोकने के लिए निवारक कार्रवाई करने का अधिकार देता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि जब सभी खाते पहले ही फ्रीज किए जा चुके हैं तो धन के आगे स्थानांतरण की आशंका कैसे बनी रह सकती है।

हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि वह मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है। अदालत ने कहा कि सभी कानूनी और तथ्यात्मक मुद्दों पर निर्णय कलकत्ता हाईकोर्ट करेगा। फिलहाल केवल यह देखा जा रहा है कि अंतिम निर्णय आने तक पार्टी के आवश्यक खर्चों के लिए सीमित राशि उपलब्ध कराई जा सकती है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि दोनों पक्ष विशेष अधिकारी के माध्यम से आवश्यक खर्चों के लिए एक सीमित राशि जारी करने की संभावना पर विचार करें। इस पर ईडी ने निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा, जिसके बाद मामले की सुनवाई अगले मंगलवार तक स्थगित कर दी गई।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला पश्चिम बंगाल के विधायक बिश्वनाथ दास द्वारा 18 जून 2026 को दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अवैध गतिविधियों से प्राप्त धनराशि को एचडीएफसी बैंक के तीन खातों के माध्यम से संचालित किया गया। इसके आधार पर एफआईआर दर्ज हुई और ईडी ने 23 जून 2026 को ईसीआईआर दर्ज किया। जांच और तलाशी के बाद 7 जुलाई 2026 को ईडी ने छह बैंक खातों को फ्रीज कर दिया, जिनमें टीएमसी के तीन खाते भी शामिल थे।

टीएमसी ने इन आदेशों को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि खातों को बिना किसी स्पष्ट “अपराध की आय” की पहचान किए मनमाने ढंग से फ्रीज किया गया है। पार्टी ने हाईकोर्ट के एक पूर्व आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें विशेष अधिकारी के माध्यम से कुछ खातों का संचालन दैनिक खर्चों के लिए करने की अनुमति दी गई थी।

हालांकि, कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अपनी आपत्तियां पीएमएलए निर्णायक प्राधिकरण तथा लंबित रिट याचिका में उठा सकते हैं। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया कोई ऐसा मामला नहीं पाया जिससे अंतरिम राहत दी जा सके और कहा कि ईडी ने खातों को फ्रीज करने के लिए आवश्यक कारण दर्ज किए हैं।

यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता हाईकोर्ट दोनों के समक्ष लंबित है। सुप्रीम कोर्ट फिलहाल केवल यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि अंतिम निर्णय आने तक पार्टी के आवश्यक प्रशासनिक कार्य पूरी तरह बाधित न हों, जबकि मामले के मूल विवाद पर निर्णय हाईकोर्ट करेगा।