बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी डॉक्टरों की 24 महीने की पहले से स्वीकृत और ली जा चुकी स्टडी लीव को बाद में जारी सरकारी आदेश के आधार पर 36 महीने तक बढ़ाने की मांग खारिज कर दी है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने कहा कि 3 मार्च 2025 के सरकारी आदेश में स्टडी लीव की अधिकतम सीमा 36 महीने की गई थी, लेकिन इसका लाभ पूर्व में स्वीकृत और पूर्ण हो चुके 24 महीने के अवकाश पर पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं किया जा सकता।
मामले में डॉक्टरों ने तर्क दिया था कि 3 मार्च 2025 के आदेश के बाद उन्हें भी अतिरिक्त 12 महीने की स्टडी लीव का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने समान परिस्थितियों वाले अन्य डॉक्टरों को मिले लाभ का हवाला देते हुए संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता का दावा किया था।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बाद में जारी कोई लाभकारी आदेश तभी पुराने मामलों पर लागू हो सकता है, जब उसमें स्पष्ट रूप से पूर्वव्यापी प्रभाव का प्रावधान हो। कोर्ट ने कहा कि “बाद में दी गई छूट से पहले से स्वीकृत 24 महीने की स्टडी लीव स्वतः 36 महीने में परिवर्तित नहीं हो जाती।”
कोर्ट ने सभी संबंधित रिट याचिकाएं खारिज कर दीं और कहा कि 3 मार्च 2025 का आदेश मुख्य रूप से उस तारीख के बाद स्टडी लीव के लिए आवेदन करने वाले पात्र डॉक्टरों पर लागू होगा।
