दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो जिला न्यायाधीशों को किया निलंबित, अलग-अलग मामलों में होगी विभागीय जांच

Delhi High Court

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा (Delhi Higher Judicial Service) के दो जिला न्यायाधीशों को अलग-अलग मामलों में लगाए गए गंभीर आरोपों के चलते विभागीय जांच लंबित रहने तक तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। न्यायालय ने दोनों अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं।

तिस हजारी न्यायालय में पदस्थ जिला न्यायाधीश विनय सिंघल को 10 जुलाई को निलंबित किया गया, जबकि साकेत न्यायालय में पदस्थ जिला न्यायाधीश वीणा रानी के निलंबन का आदेश 15 जुलाई को जारी किया गया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वीणा रानी पर न्यायिक मामलों में कथित फोरम शॉपिंग से जुड़े आरोप हैं। वहीं विनय सिंघल पर न्यायालय के नीलामी अधिकारियों (Court Auctioneers) की नियुक्ति में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। उन पर कथित रूप से अयोग्य व्यक्तियों की नियुक्ति करने तथा उन्हें नियमों के विपरीत अधिक भुगतान की अनुमति देने का आरोप है।

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेशों में कहा गया है कि दोनों न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 तथा दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा नियमों के तहत विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ की जाएगी। जांच पूरी होने तक दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित रखा जाएगा।

निलंबन अवधि के दौरान वीणा रानी का मुख्यालय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दक्षिण-पूर्व जिला, साकेत का कार्यालय होगा, जबकि विनय सिंघल को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मध्य जिला, तिस हजारी न्यायालय के कार्यालय में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।

उच्च न्यायालय ने दोनों अधिकारियों को पूर्व अनुमति के बिना दिल्ली से बाहर नहीं जाने का भी निर्देश दिया है। विभागीय जांच में दोनों मामलों की स्वतंत्र रूप से जांच की जाएगी और संबंधित सेवा नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।