छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट: कलेक्टर की अनुमति बिना वसीयत से गैर-आदिवासी को आदिवासी भूमि नहीं दी जा सकती

JUSTICE AMITENDRA KISHORE PRASAD, JUDGE HIGH COURT OF CHHATTISGARH

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) की भूमि को कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना वसीयत (Will) के माध्यम से गैर-आदिवासी के नाम हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि केवल वसीयत के आधार पर आदिवासी भूमि पर गैर-आदिवासी कोई अधिकार प्राप्त नहीं कर सकता, क्योंकि ऐसा करना छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 165 के उद्देश्य को विफल कर देगा।

हाईकोर्ट ने बोर्ड ऑफ रेवेन्यू, बिलासपुर के 17 मई 2023 के आदेश को रद्द करते हुए सरगुजा संभाग के आयुक्त का आदेश बहाल कर दिया। अदालत ने कहा कि कानून का उद्देश्य आदिवासी समुदाय की भूमि को गैर-आदिवासियों के हाथों में जाने से रोकना है और इस संरक्षण को वसीयत जैसे माध्यम से भी दरकिनार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित राजस्व अधिकारी कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करें।