बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने BDS अंतिम वर्ष की छात्रा की चार विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं के स्वतंत्र पुनर्मूल्यांकन का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने Shirin Akhtar बनाम State of Chhattisgarh & Others, WPC No. 4476/2026 में यह आदेश दिया।
छात्रा को कुल 1600 में 1002 अंक मिले थे, लेकिन Public Health Dentistry, Periodontology, Oral & Maxillofacial Surgery तथा Conservative Dentistry & Endodontics में न्यूनतम थ्योरी अंक नहीं मिलने के कारण उसे अनुत्तीर्ण घोषित किया गया था। छात्रा ने डिजिटल मूल्यांकन में कथित अनियमितताओं और कुछ उत्तरों पर बेहद कम अथवा शून्य अंक दिए जाने को चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि सामान्यतः परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन में न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जाता, लेकिन “जहां रिकॉर्ड पर मूल्यांकन में स्पष्ट मनमानी या गंभीर त्रुटि दिखाई दे, वहां अनुच्छेद 226 के तहत असाधारण परिस्थितियों में हस्तक्षेप किया जा सकता है।”
कोर्ट ने विश्वविद्यालय को चारों विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया है। पुनर्मूल्यांकन एक माह में और उसके बाद संशोधित अंकसूची दो माह के भीतर जारी करने को कहा गया है। याचिका स्वीकार करते हुए कोर्ट ने लागत के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया।
