छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रमेश सिन्हा को दी विदाई, कार्यकाल में 50 हजार से अधिक मामलों का निराकरण

Chief Justice Shri Justice Ramesh Sinha Receives a Warm Farewell at the High Court of Chhattisgarh

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा को उनके कार्यकाल पूर्ण होने पर भावभीनी विदाई दी। विदाई समारोह में हाईकोर्ट के न्यायाधीशों, रजिस्ट्रार जनरल एवं रजिस्ट्री के अधिकारियों-कर्मचारियों, अधिवक्ताओं, महाधिवक्ता, राज्य शासन के प्रतिनिधियों तथा न्यायिक जगत से जुड़े लोगों ने उनके कार्यकाल और न्याय व्यवस्था में योगदान को याद किया।

न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने 29 मार्च 2023 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 15वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण किया था। उनके कार्यकाल के दौरान न्यायिक मामलों के त्वरित निराकरण के साथ-साथ न्यायिक अधोसंरचना, संस्थागत विकास और न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी एवं नागरिक-केंद्रित बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यकाल में 50,228 मामलों का निराकरण

विदाई समारोह में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 29 मार्च 2023 से 1 सितंबर 2026 तक न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कुल 50,228 मामलों का निराकरण किया। इनमें 32,600 मामले सिंगल बेंच तथा 17,628 मामले डिवीजन बेंच के माध्यम से निपटाए गए।

इस दौरान उन्होंने न्यायिक कार्यक्षमता और लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण को प्राथमिकता दी। समारोह में यह भी बताया गया कि लगभग सात माह की एक अवधि में उनके द्वारा 6,498 मामलों का निराकरण किया गया, जो उस अवधि में हाईकोर्ट के कुल निपटाए गए मामलों का लगभग 22 प्रतिशत था।

369 से अधिक रिपोर्टेड AFR फैसलों में योगदान

न्यायमूर्ति सिन्हा का योगदान केवल मामलों के निराकरण तक सीमित नहीं रहा। उनके कार्यकाल में 369 से अधिक रिपोर्टेड AFR (Approved for Reporting) फैसले सामने आए, जिनमें संविधान, आपराधिक कानून, मध्यस्थता और सेवा कानून सहित विभिन्न महत्वपूर्ण कानूनी विषयों से जुड़े प्रश्नों पर निर्णय दिए गए।

महाधिवक्ता ने अपने संबोधन में बताया कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभालने से पहले न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा लगभग 1,34,200 निर्णय दे चुके थे। इसे उनके लंबे न्यायिक अनुभव, विधिक ज्ञान और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया गया।

मुख्य न्यायाधीश ने संस्थागत विकास को बताया महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

विदाई समारोह को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी केवल न्यायिक मामलों के निपटारे और प्रशासन तक सीमित नहीं है। इसके साथ न्यायिक संस्थान को मजबूत बनाना, बेहतर अधोसंरचना विकसित करना, गरिमापूर्ण कार्य वातावरण उपलब्ध कराना और न्यायपालिका से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति में संस्थान के प्रति अपनत्व की भावना पैदा करना भी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि अदालत केवल ईंट, पत्थर और कंक्रीट से बनी इमारत नहीं है। यह वह स्थान है जहां आम नागरिक अपनी उम्मीदों, शिकायतों और कानून के शासन में विश्वास के साथ पहुंचता है। इसलिए न्यायिक अधोसंरचना भी न्यायपालिका की गरिमा के अनुरूप होनी चाहिए।

अधिकार किसी की कृपा नहीं, बल्कि वैध हक हैं

मुख्य न्यायाधीश ने न्यायाधीशों, अधिकारियों और कर्मचारियों के कल्याण एवं वैध अधिकारों पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का वैध अधिकार कोई कृपा, रियायत या विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि ऐसा हक है जिसे संस्थान को अनावश्यक देरी या कठिनाई के बिना उपलब्ध कराने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने उम्मीद जताई कि हाईकोर्ट से जुड़ा प्रत्येक व्यक्ति इसे “मेरा संस्थान” समझे और महसूस करे कि संस्थान उसके कार्य का सम्मान करता है, उसके योगदान को पहचानता है और उसके साथ निष्पक्ष व्यवहार करता है।

न्यायपालिका में बार और बेंच की महत्वपूर्ण भूमिका

न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने न्याय व्यवस्था में अधिवक्ताओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बार और बेंच एक ही न्यायिक प्रणाली के अभिन्न अंग हैं और मजबूत, स्वतंत्र तथा गरिमापूर्ण बार एक मजबूत न्यायपालिका के लिए आवश्यक है।

उन्होंने हाईकोर्ट के न्यायाधीशों, रजिस्ट्री के अधिकारियों और कर्मचारियों तथा अधिवक्ताओं को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही न्यायिक अधोसंरचना के विकास में सहयोग के लिए राज्य शासन, विभिन्न विभागों, संबंधित एजेंसियों और जिला प्रशासन के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने की प्रशंसा

विदाई समारोह में न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल ने मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के न्यायिक करियर और नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह अवसर केवल औपचारिक विदाई का नहीं, बल्कि ऐसे विशिष्ट न्यायविद के योगदान को सम्मानित करने का अवसर है, जिनकी न्यायिक समझ, ईमानदारी, प्रतिबद्धता और प्रशासनिक नेतृत्व ने हाईकोर्ट की संस्थागत क्षमता को मजबूत किया।

महाधिवक्ता सहित अन्य वक्ताओं ने भी न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा के लंबे न्यायिक अनुभव और छत्तीसगढ़ की न्याय व्यवस्था में उनके योगदान को रेखांकित किया।

“हमारी अंतिम जिम्मेदारी एक मजबूत संस्थान छोड़कर जाना है”

अपने विदाई संबोधन में न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने संस्थागत मूल्यों को सर्वोच्च महत्व देने की बात कही। उन्होंने कहा कि संस्थान केवल अपनी भौतिक संरचनाओं के बल पर नहीं, बल्कि निष्पक्षता, विश्वास, प्रतिबद्धता और न्याय के प्रति निष्ठा जैसे मूल्यों के आधार पर मजबूत बने रहते हैं।

उन्होंने न्यायाधीशों, अधिकारियों और कर्मचारियों से संस्थान के प्रति विश्वास बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का पद अस्थायी होता है, लेकिन संस्थान को लंबे समय तक कायम रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उनका कार्यकाल तभी सार्थक माना जाएगा, यदि वे अपने पीछे ऐसा संस्थान छोड़कर जाएं जो उन्हें प्राप्त हुए संस्थान से “थोड़ा अधिक मजबूत” हो।

विदाई समारोह के अवसर पर हाईकोर्ट के न्यायाधीशों, रजिस्ट्री, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बार तथा पूरे न्यायिक समुदाय ने न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया और उनके स्वस्थ, सुखी, शांतिपूर्ण एवं संतोषपूर्ण भविष्य की कामना की।