सुप्रीम कोर्ट ने टाटा पावर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड (TPTCL) और कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों के बीच विवाद में अपीलीय विद्युत अधिकरण (APTEL) के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने APTEL के उस निर्णय को बरकरार रखा, जिसमें बिजली की कम आपूर्ति से संबंधित लिक्विडेटेड डैमेज को कायम रखा गया था, जबकि गेमिंग मुआवजा, अनिर्धारित अंतर (UI) शुल्क और ओपन एक्सेस शुल्क से जुड़ी KERC की अतिरिक्त देनदारियों को हटाया गया था।
जस्टिस पामिदिघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने माना कि कर्नाटक विद्युत नियामक आयोग (KERC) ने गेमिंग और उससे जुड़े मुआवजे का फैसला करते समय पक्षकारों की दलीलों से आगे जाकर निर्णय दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 86(1)(f) के तहत नियामक आयोग के अधिकार क्षेत्र को लेकर APTEL की इस व्याख्या को भी स्वीकार किया।
मामला 6 सितंबर 2013 को हुए एक शॉर्ट-टर्म पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) से जुड़ा था। इसके तहत TPTCL को नवंबर 2013 से मार्च 2014 के बीच कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों को निर्धारित मात्रा में बिजली की आपूर्ति करनी थी। बिजली की आपूर्ति के लिए TPTCL का बैक-टू-बैक समझौता भद्राश्री स्टील एंड पावर लिमिटेड के साथ था।
PPA की अवधि के दौरान निर्धारित मात्रा से कम बिजली की आपूर्ति हुई। वितरण कंपनियों ने इसके लिए लिक्विडेटेड डैमेज, UI चार्ज और अन्य मदों में कटौती की। TPTCL ने बिजली की कमी के लिए जनरेटर की चूक को जिम्मेदार बताया और नवंबर-दिसंबर 2013 के लिए फोर्स मेज्योर का भी हवाला दिया।
विवाद बढ़ने पर TPTCL ने KERC का रुख किया और कटौती को अवैध बताते हुए रकम वापस करने तथा 15 प्रतिशत वार्षिक दर से कैरिंग कॉस्ट देने की मांग की। KERC ने याचिका खारिज करते हुए TPTCL को करीब 4.88 करोड़ रुपये के मुआवजे के लिए जिम्मेदार ठहराया था।
इसके बाद APTEL ने KERC के कई निष्कर्षों को पलट दिया और केवल कम बिजली आपूर्ति से संबंधित लिक्विडेटेड डैमेज को बनाए रखा। सुप्रीम कोर्ट ने अब APTEL के इस दृष्टिकोण में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अलग-अलग और कानूनी रूप से स्वतंत्र शॉर्ट-टर्म PPAs से उत्पन्न क्रॉस-डिमांड के बीच सामान्य रूप से equitable set-off का लाभ नहीं लिया जा सकता, जब तक कि दोनों दावे एक ही लेन-देन से संबंधित न हों। फैसले से बिजली व्यापार, PPA विवादों और विद्युत नियामक आयोगों के अधिकार क्षेत्र से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी मार्गदर्शन मिलता है।
