नई दिल्ली: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) 2026 को रद्द कर देशभर में दोबारा आयोजित करने के राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) की पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. मंगला कोहली ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर इस निर्णय को रद्द करने की मांग की है।
अधिवक्ता अभिषेक चंद्र मिश्रा के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि लगभग 22 लाख अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देने के लिए बाध्य करना संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 के तहत प्राप्त उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में तर्क दिया गया है कि प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप गंभीर हैं तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन प्रशासनिक विफलताओं का खामियाजा लाखों ईमानदार छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच से कुछ विशेष केंद्रों और क्षेत्रों में संगठित नेटवर्क के जरिए परीक्षा प्रक्रिया से समझौता किए जाने के संकेत मिले हैं। हालांकि उपलब्ध सामग्री से पूरे देश में परीक्षा के व्यापक रूप से प्रभावित होने का प्रमाण नहीं मिलता। इसके बावजूद NTA ने पूरे देश की परीक्षा रद्द कर पुनर्परीक्षा का निर्णय लिया।
डॉ. कोहली ने कहा है कि इस फैसले से लाखों छात्रों को मानसिक तनाव, शैक्षणिक अनिश्चितता और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। याचिका में मांग की गई है कि दोषी अभ्यर्थियों, परीक्षा केंद्रों और संबंधित व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए, न कि सभी उम्मीदवारों पर सामूहिक दंड लगाया जाए।
याचिका में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए तकनीकी और संस्थागत सुधारों की भी मांग की गई है। इसमें एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्रश्नपत्र वितरण, बायोमेट्रिक सत्यापन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और सुरक्षित कंप्यूटर आधारित परीक्षा ढांचे को लागू करने की मांग शामिल है। साथ ही NTA की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने का अनुरोध भी किया गया है।
अंतरिम राहत के रूप में याचिका में NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा कराने के फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई है। यह याचिका ऐसे समय दाखिल की गई है जब NEET-UG 2026 पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट लगातार सुनवाई कर रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित कराने की मांग वाली याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया था।
