सुप्रीम कोर्ट में हंगामा: न्यायाधीशों के समक्ष अभद्र व्यवहार और फाइलें फेंकने पर याचिकाकर्ता को कोर्टरूम से बाहर निकाला गया

Supreme Court of India

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में उस समय अभूतपूर्व स्थिति उत्पन्न हो गई जब स्वयं अपनी पैरवी कर रहे एक याचिकाकर्ता को कथित रूप से न्यायालय के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग करने और पीठ की ओर केस से संबंधित दस्तावेज फेंकने के बाद सुरक्षा कर्मियों ने कोर्टरूम से बाहर निकाल दिया। यह घटना न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान हुई।

याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी रिट याचिका खारिज कर दी गई थी। उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) की धारा 173(4) के तहत दायर अपने आवेदन को निजी परिवाद (प्राइवेट कंप्लेंट) में परिवर्तित किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी।

सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर आक्रामक रुख अपनाया और अदालत से लखनऊ के विकास नगर के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराने का निर्देश देने की मांग की। इतना ही नहीं, उन्होंने कथित रूप से यह भी कहा कि वह अदालत को ऐसा आदेश देने के लिए “निर्देश” दे रहे हैं।

इस पर न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए पूछा कि क्या वह न्यायालय को निर्देश देने का प्रयास कर रहे हैं। इसके जवाब में याचिकाकर्ता ने कहा कि उनके पास कहने के लिए कुछ और नहीं है और सभी तथ्य पहले से ही रिकॉर्ड पर मौजूद हैं।

कुछ ही देर बाद स्थिति और गंभीर हो गई। आरोप है कि याचिकाकर्ता ने केस से संबंधित दस्तावेजों का एक बंडल पीठ की ओर फेंक दिया, जिससे कागज पूरे कोर्टरूम में बिखर गए। इसके साथ ही उन्होंने कथित रूप से भारत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ भी अभद्र टिप्पणियां कीं, जिससे कुछ समय के लिए न्यायिक कार्यवाही बाधित हो गई।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया, याचिकाकर्ता को काबू में लेकर कोर्टरूम से बाहर ले गए और व्यवस्था बहाल की। पूरे घटनाक्रम के दौरान न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक आराधे शांत रहे तथा उन्होंने याचिकाकर्ता के व्यवहार पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद पीठ ने दिन के शेष मामलों की सुनवाई जारी रखी।

इस घटना ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। इससे पहले अक्टूबर 2025 में भी एक अधिवक्ता ने तत्कालीन भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ की ओर कथित रूप से जूता फेंकने का प्रयास किया था। उस समय भी सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप कर किसी भी अप्रिय घटना को टाल दिया था। बाद में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने संबंधित अधिवक्ता का लाइसेंस निलंबित कर दिया था, जबकि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने उसकी सदस्यता समाप्त कर दी थी। हालांकि, न्यायमूर्ति बी. आर. गवई ने बाद में संकेत दिया था कि उस अधिवक्ता के विरुद्ध आगे कोई अतिरिक्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।