सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को CBSE की तीन-भाषा नीति को लेकर सुनवाई करते हुए कक्षा 6 के छात्रों को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि कक्षा 6 के छात्रों को भी वही छूट दी जाए जो फिलहाल कक्षा 7 के छात्रों को दी जा रही है। इसके तहत छात्र तीसरी भाषा की पढ़ाई जारी रखेंगे, लेकिन केवल उस भाषा में असफल होने के आधार पर उन्हें अगली कक्षा में जाने से नहीं रोका जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ CBSE की तीन-भाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। संशोधित व्यवस्था 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू की जा रही है, जिसके तहत छात्रों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना है, जिनमें दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि कई छात्र पहले से ही अपनी भाषा का चयन कर चुके हैं और वर्षों से उसका अध्ययन कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर बताया गया कि कुछ छात्र कक्षा 4 से स्पेनिश पढ़ रहे थे, लेकिन अब उन्हें संस्कृत जैसी भाषा लेने के लिए कहा जा रहा है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि अचानक नीति लागू होने से छात्रों और स्कूलों के सामने शिक्षकों तथा पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता जैसी व्यावहारिक समस्याएं पैदा हो रही हैं।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि नीति को पहले 2030 से लागू करने की बात थी, लेकिन इसे पर्याप्त संक्रमण अवधि दिए बिना 2026 से लागू किया जा रहा है। कोर्ट ने विशेष रूप से उन छात्रों की स्थिति पर चिंता जताई जो पहले से अपनी स्कूली शिक्षा के बीच में हैं।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि छात्रों की संख्या सीमित है और वे नई व्यवस्था के अनुसार खुद को ढाल लेंगे। इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि अदालत छात्रों के लिए कठिनाई नहीं, बल्कि सुविधा चाहती है।
पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता को लेकर भी सुनवाई के दौरान सवाल उठे। केंद्र की ओर से बताया गया कि किताबें ऑनलाइन उपलब्ध करा दी गई हैं, जबकि याचिकाकर्ताओं ने कहा कि केवल ऑनलाइन किताबें उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है और कई छात्रों को भौतिक पाठ्यपुस्तकों की जरूरत है।
तीसरी भाषा के मूल्यांकन को लेकर भी चिंता जताई गई। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यदि तीसरी भाषा में उत्तीर्ण होना कक्षा 10 का प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए आवश्यक माना जाता है, तो छात्रों को भविष्य में परेशानी हो सकती है। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि यदि कोई स्कूल वास्तव में इसी आधार पर किसी छात्र का प्रमाणपत्र रोकता है, तो सुप्रीम कोर्ट तुरंत हस्तक्षेप करेगा।
अंततः सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7 के छात्रों के समान अंतरिम राहत देने का निर्देश दिया। फिलहाल तीसरी भाषा की पढ़ाई जारी रहेगी, लेकिन केवल उस भाषा के मूल्यांकन में असफल होने के कारण छात्र को रोका नहीं जाएगा। मामले में तीन-भाषा नीति के व्यापक प्रभाव और इसके कार्यान्वयन से जुड़ी अन्य चिंताओं पर आगे सुनवाई जारी रहेगी।
