छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जूनियर इंजीनियरों की याचिका खारिज की, असिस्टेंट इंजीनियर पद पर 70% प्रमोशन कोटा बहाल करने से इनकार

JUSTICE BIBHU DATTA GURU, JUDGE HIGH COURT OF CHHATTISGARH

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने असिस्टेंट इंजीनियर (जनरेशन) के पदों पर पदोन्नति कोटा 70% से घटाकर 40% किए जाने को चुनौती देने वाली 39 जूनियर इंजीनियरों की याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने कहा कि किसी कर्मचारी को किसी निश्चित प्रतिशत के प्रमोशन कोटे के तहत पदोन्नति पाने का कोई अर्जित या अपरिवर्तनीय अधिकार नहीं है।

याचिकाकर्ता छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने 5 मई 2025 और 22 जुलाई 2026 के आदेशों को चुनौती दी थी। इन आदेशों के तहत असिस्टेंट इंजीनियर के पदों पर भर्ती का अनुपात 40% पदोन्नति, 10% विभागीय भर्ती और 50% खुली सीधी भर्ती निर्धारित किया गया था। इसके बाद 7 अगस्त 2026 को जारी भर्ती विज्ञापन को भी चुनौती दी गई थी, जिसमें असिस्टेंट इंजीनियर (जनरेशन) के 60 पदों पर सीधी भर्ती प्रस्तावित थी।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वर्ष 2021 में असिस्टेंट इंजीनियर पद के लिए पदोन्नति कोटा 40% से बढ़ाकर 70% किया गया था। वर्ष 2018 में जूनियर इंजीनियर नियुक्त हुए याचिकाकर्ताओं ने आवश्यक सेवा अवधि पूरी कर ली थी और उनका नाम 21 फरवरी 2024 की ग्रेडेशन सूची में शामिल था। उनका तर्क था कि 70% प्रमोशन कोटा कम करने से उनके पदोन्नति के अवसर प्रभावित हुए हैं।

कंपनी की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि 70% कोटा कोई स्थायी सेवा शर्त नहीं थी। आगामी नए पावर प्लांट और पंप स्टोरेज परियोजनाओं के लिए अधिक संख्या में योग्य ग्रेजुएट इंजीनियरों की आवश्यकता है। इसी आवश्यकता को देखते हुए 50% पदों को खुली सीधी भर्ती के लिए निर्धारित किया गया है।

कोर्ट के समक्ष रखे गए विभागीय नोट के अनुसार, 470 स्वीकृत असिस्टेंट इंजीनियर पदों के मुकाबले 499 अधिकारी कार्यरत थे। विभाग ने यह भी बताया कि भर्ती प्रक्रिया, नियुक्ति और आवश्यक प्रशिक्षण पूरा कर नए इंजीनियरों को प्लांट में तैनात करने में करीब दो वर्ष का समय लग सकता है। कोर्ट ने इस प्रशासनिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए कोटा संशोधन को नीति संबंधी निर्णय माना।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “mere eligibility for consideration does not confer any vested or indefeasible right to promotion”, यानी केवल पदोन्नति के लिए पात्र हो जाना कर्मचारी को प्रमोशन का कोई अर्जित या अपरिवर्तनीय अधिकार नहीं देता। कोर्ट ने यह भी कहा कि कर्मचारी किसी विशेष प्रतिशत की रिक्तियों को पदोन्नति के माध्यम से भरने की मांग नहीं कर सकता।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पदोन्नति के कोटे और अलग-अलग भर्ती माध्यम तय करना मुख्य रूप से नियोक्ता के नीति-निर्धारण के क्षेत्र में आता है। अदालत तभी हस्तक्षेप कर सकती है जब ऐसा निर्णय मनमाना, दुर्भावनापूर्ण, असंवैधानिक या वैधानिक प्रावधानों के विपरीत साबित हो।

कोर्ट ने यह भी माना कि 70% से 40% प्रमोशन कोटा होने से याचिकाकर्ताओं के पदोन्नति के अवसर कम हुए हैं, लेकिन केवल अवसर कम होना संविधान के अनुच्छेद 14 या 16 का उल्लंघन नहीं है। कर्मचारियों का अधिकार लागू नियमों के अनुसार पदोन्नति के लिए निष्पक्ष विचार किए जाने तक सीमित है।

अदालत ने अप्रैल 2026 में 23 जूनियर इंजीनियरों को असिस्टेंट इंजीनियर पद पर पदोन्नत किए जाने को भी याचिकाकर्ताओं के पक्ष में स्थायी अधिकार पैदा करने वाला नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि पात्र कर्मचारी, यदि निर्धारित शर्तें पूरी करते हैं, तो सीधी भर्ती प्रक्रिया में भी भाग ले सकते हैं।

अंततः हाईकोर्ट ने 5 मई 2025 और 22 जुलाई 2026 के आदेशों में कोई अवैधता, मनमानी या विकृति नहीं पाई और 7 अगस्त 2026 के भर्ती विज्ञापन पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया। इसके साथ ही WPS No. 6238 of 2026 को मेरिट से रहित मानते हुए खारिज कर दिया गया।