दिल्ली हाईकोर्ट ने NEET-UG पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर प्रतिबंध के खिलाफ याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट ने NEET-UG पुनर्परीक्षा से पहले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम की सेवाओं पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से महत्वपूर्ण सवाल पूछते हुए कहा कि कुछ परीक्षार्थियों द्वारा संभावित दुरुपयोग की आशंका के आधार पर लगभग 15 करोड़ उपयोगकर्ताओं के अधिकारों को कैसे सीमित किया जा सकता है।

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि टेलीग्राम की तकनीकी संरचना, विशेष रूप से इसके बॉट सिस्टम और क्लाउड आधारित संचालन, इसे परीक्षा से संबंधित गोपनीय सामग्री के बड़े पैमाने पर प्रसार के लिए संवेदनशील बनाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने विशेष चुनौतियां उत्पन्न होती हैं और परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह कदम आवश्यक था।

हालांकि, अदालत ने कहा कि मुख्य प्रश्न यह है कि क्या बड़ी संख्या में नागरिकों के अधिकारों पर रोक लगाकर दूसरे वर्ग के लोगों के हितों की रक्षा की जा सकती है। अदालत ने संकेत दिया कि उसे इस मामले में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संचार के अधिकार और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन स्थापित करने के पहलू पर विचार करना होगा।

केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत यह प्रतिबंध लगाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की सिफारिश पर यह निर्णय लिया था। सरकार का कहना है कि 21 जून को होने वाली NEET-UG पुनर्परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र या अन्य गोपनीय सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।

गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा को प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था, जिसके बाद पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया। केंद्र का तर्क है कि परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए असाधारण उपाय आवश्यक हैं।

सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को शाम 7 बजे तक अतिरिक्त लिखित दलीलें दाखिल करने की अनुमति दी और मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अब सभी की नजरें अदालत के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी मार्गदर्शन प्रदान कर सकता है।