छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वर्ष 2014 के एक हत्या मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी श्याम सुंदर बघेल उर्फ किर्का को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी और अटूट श्रृंखला स्थापित करने में असफल रहा, इसलिए उसे संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए।
मामला दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा क्षेत्र में मेहतर बघेल की हत्या से जुड़ा था। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने पाया कि आरोपी से बरामद किए गए कथित हथियार और कपड़ों पर फॉरेंसिक जांच में खून के कोई निशान नहीं मिले। इसके अलावा, अभियोजन द्वारा बताया गया भूमि विवाद का कथित मकसद भी हत्या में आरोपी की संलिप्तता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं था।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध Sharad Birdhichand Sarda फैसले का हवाला देते हुए कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य वाले मामलों में हर कड़ी पूरी तरह सिद्ध होना आवश्यक है। यदि साक्ष्यों की श्रृंखला में कोई कमी रह जाती है, तो केवल संदेह के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती।
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए आरोपी को हत्या के आरोप से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए आवश्यक कानूनी मानकों को पूरा नहीं कर सका।
