दिल्ली हाईकोर्ट ने वरिष्ठ पत्रकार अंजना ओम कश्यप, टीवी टुडे नेटवर्क और चर्चित शिक्षक फैसल खान उर्फ खान सर के बीच चल रहे मानहानि विवाद को सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए मध्यस्थता (मेडिएशन) के लिए भेज दिया है। अदालत ने माना कि दोनों पक्ष बातचीत के माध्यम से विवाद सुलझाने के इच्छुक हैं और ऐसे मामलों में लंबी न्यायिक प्रक्रिया की बजाय संवाद बेहतर विकल्प हो सकता है।
न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की एकलपीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव को मध्यस्थ नियुक्त करते हुए पक्षकारों को उसी दिन उनके समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को निर्धारित की गई है, जब अदालत मध्यस्थता की प्रगति पर विचार करेगी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने खान सर और अन्य प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे अंजना ओम कश्यप के बच्चों से संबंधित सभी सोशल मीडिया पोस्ट तत्काल हटा दें। वहीं, अदालत ने अंजना ओम कश्यप से भी कहा कि मध्यस्थता की प्रक्रिया पूरी होने तक वह शिक्षकों के विरुद्ध कोई नई टिप्पणी न करें।
अदालत ने टिप्पणी की कि शिक्षक समाज को शिक्षा देने का महत्वपूर्ण दायित्व निभाते हैं और किसी पत्रकार के बच्चों की निजी जानकारी को सार्वजनिक विवाद का हिस्सा बनाना उचित नहीं है। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सलाह दी कि वे उन शब्दों और बयानों की पहचान करें जिन्हें वे आपत्तिजनक मानते हैं और मुकदमेबाजी के बजाय बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशें।
यह मामला अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क द्वारा दायर एक दीवानी मानहानि वाद से जुड़ा है। इस वाद में खान सर, शिक्षक अभिनव शर्मा, बबीता त्यागी, अरविंद भदौरिया, मनीष यादव, कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं तथा 4PM न्यूज नेटवर्क सहित अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है। वाद में कथित मानहानिकारक सामग्री हटाने, स्थायी निषेधाज्ञा जारी करने तथा प्रतिष्ठा और साख को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 2 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की गई है।
वादपत्र के अनुसार विवाद की शुरुआत 29 मई 2026 को प्रसारित आज तक के एक कार्यक्रम से हुई, जिसमें अंजना ओम कश्यप ने नीट परीक्षा प्रणाली पर चर्चा के दौरान ऑनलाइन “स्टार टीचर्स” के बढ़ते प्रभाव और शिक्षा के व्यावसायीकरण पर टिप्पणी की थी। उनका कहना है कि यह सार्वजनिक महत्व के विषय पर निष्पक्ष पत्रकारिता के दायरे में की गई टिप्पणी थी। इसके बाद 30 मई से 4 जून के बीच कई सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो के माध्यम से उनके और टीवी टुडे नेटवर्क के खिलाफ कथित रूप से समन्वित अभियान चलाया गया।
वाद में आरोप लगाया गया है कि विभिन्न सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो में अंजना ओम कश्यप तथा आज तक के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और वैध आलोचना की सीमा से आगे जाकर उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए थे। साथ ही यह भी आरोप है कि खान सर ने अंजना ओम कश्यप के बच्चों के विद्यालय का नाम सार्वजनिक किया, जिससे उनके परिवार की सुरक्षा और निजता पर गंभीर प्रभाव पड़ा।
सुनवाई के दौरान खान सर की ओर से अदालत को बताया गया कि बच्चों से संबंधित पोस्ट हटाए जाएंगे। वहीं, उनकी ओर से यह भी अनुरोध किया गया कि अंजना ओम कश्यप भी शिक्षकों के खिलाफ आगे कोई टिप्पणी न करें। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों की आलोचना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन ऐसी आलोचना शालीनता और मर्यादा की सीमाओं के भीतर होनी चाहिए।
अब यह पूरा विवाद मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जाएगा। यदि पक्षकार आपसी सहमति तक नहीं पहुंचते हैं, तो दिल्ली हाईकोर्ट मानहानि वाद की सुनवाई आगे जारी रखेगा।
