छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 40 किलोग्राम गांजा बरामदगी मामले में दोषी मुकेश राम यादव की 14 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि जब मादक पदार्थ की बरामदगी किसी सार्वजनिक स्थान पर खड़े वाहन से होती है, तो एनडीपीएस अधिनियम की धारा 43 लागू होगी, न कि धारा 42।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए कहा कि 40 किलोग्राम गांजा फोर्ड इकोस्पोर्ट वाहन की डिक्की से बरामद हुआ था, जो व्यावसायिक मात्रा (Commercial Quantity) की श्रेणी में आता है। अदालत ने पाया कि जब्ती, नमूना संग्रहण और एफएसएल जांच की पूरी प्रक्रिया विधिसम्मत तरीके से की गई थी तथा बरामद पदार्थ गांजा होने की पुष्टि हुई थी।
आरोपी ने तर्क दिया था कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा 42 और 50 का पालन नहीं किया गया, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि वाहन की तलाशी सार्वजनिक स्थान पर ली गई थी, इसलिए धारा 43 लागू होगी। साथ ही, चूंकि बरामदगी आरोपी की व्यक्तिगत तलाशी से नहीं बल्कि वाहन से हुई थी, इसलिए धारा 50 के प्रावधान भी लागू नहीं होते।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने यह साबित कर दिया है कि आरोपी वाहन में रखे गांजे के “सचेत कब्जे” (Conscious Possession) में था। इसलिए विशेष न्यायालय द्वारा दी गई दोषसिद्धि और सजा में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। परिणामस्वरूप, आरोपी की अपील खारिज कर दी गई और 14 वर्ष की सजा तथा ₹1 लाख जुर्माने का आदेश यथावत रखा गया।
