छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटना से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि केवल वाहन का तेज रफ्तार से चलना, चालक को लापरवाह या उतावला साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि वाहन इस तरह चलाया गया जिससे मानव जीवन खतरे में पड़ा।
जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने State of Chhattisgarh v. Vijay Singh Rajput (ACQA No. 163 of 2022) में राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए आरोपी की बरी होने के फैसले को बरकरार रखा। मामला 2018 में हुई सड़क दुर्घटना से जुड़ा था, जिसमें आरोपी पर आईपीसी की धारा 279, 337 और 338 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल “तेज रफ्तार” का उल्लेख अपने आप में आपराधिक लापरवाही साबित नहीं करता। चूंकि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि आरोपी ने वाहन को वास्तव में लापरवाही या उतावलेपन से चलाया था, इसलिए ट्रायल कोर्ट द्वारा दिया गया बरी करने का फैसला सही माना गया।
