अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के कथित गबन से जुड़े मामले में सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय महत्वपूर्ण सुनवाई करेगा। न्यायालय के समक्ष दायर याचिकाओं में मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि दान राशि के कथित दुरुपयोग के आरोपों की स्वतंत्र जांच कराकर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस मामले में जांच पहले से जारी है। 7 जुलाई को अयोध्या की एक अदालत ने मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में से तीन को एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेजने की अनुमति दी थी, ताकि जांच एजेंसियां उनसे विस्तृत पूछताछ कर सकें। इससे पहले 29 जून को स्थानीय अदालत ने सभी आठ आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। यह कदम श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उठाया गया, जब मंदिर में प्राप्त दान राशि के कथित गबन और अनियमितताओं के आरोप सामने आए।
सोमवार को होने वाली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय इस बात पर विचार करेगा कि मामले की जांच निष्पक्ष, प्रभावी और निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी हो, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे और यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी पूरी सच्चाई सामने आ सके। इस मामले पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं क्योंकि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
