पुलिस भर्ती में FIR दर्ज होना अपने आप अयोग्यता नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

JUSTICE BIBHU DATTA GURU, JUDGE HIGH COURT OF CHHATTISGARH

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित होना पुलिस भर्ती के लिए स्वतः अयोग्यता नहीं है, लेकिन केवल FIR की जानकारी देने से नियुक्ति का अधिकार भी नहीं मिल जाता। पुलिस सेवा में नियुक्ति से पहले अभ्यर्थी के पूरे आपराधिक रिकॉर्ड और चरित्र का निष्पक्ष मूल्यांकन जरूरी है।

जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की पीठ ने कांस्टेबल (GD) पद के अभ्यर्थी नरेंद्र पाल बर्मन की याचिका का निराकरण करते हुए सक्षम प्राधिकारी को उसके सभी आपराधिक मामलों की जांच कर नियुक्ति की पात्रता पर निर्णय लेने का निर्देश दिया। अभ्यर्थी ने दो FIR की जानकारी दी थी, जबकि राज्य के अनुसार उसके खिलाफ कुल 10 आपराधिक मामले लंबित थे। इनमें IPC की धारा 307 सहित कई गंभीर धाराएं शामिल थीं।

कोर्ट ने कहा कि “किसी आपराधिक मामले का खुलासा मात्र नियुक्ति का पूर्ण अधिकार प्रदान नहीं करता।” साथ ही लंबित आपराधिक मामले को हर परिस्थिति में स्वतः अयोग्यता मानना भी उचित नहीं है। पुलिस बल की अनुशासित प्रकृति को देखते हुए उम्मीदवार के चरित्र, आपराधिक पृष्ठभूमि और आरोपों की गंभीरता का समग्र परीक्षण आवश्यक है।

हाईकोर्ट ने संबंधित प्राधिकारी को सभी मामलों की जानकारी सत्यापित कर कारणयुक्त आदेश पारित करने और यथासंभव 60 दिनों के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया। कोर्ट ने अभ्यर्थी की अंतिम नियुक्ति पात्रता पर कोई राय व्यक्त नहीं की