बिलासपुर। कोटा ब्लॉक के ग्राम जोगीपुर में प्रस्तावित गो-अभयारण्य का काम करीब दो साल से अधर में है। परियोजना के लिए अब तक करीब ₹1.29 करोड़ की राशि स्वीकृत की जा चुकी है, लेकिन मौके पर अपेक्षित निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल मुख्य रूप से फेंसिंग का काम ही आगे बढ़ा है और इसके लिए चेक जारी किया गया है।
जोगीपुर में करीब 50 एकड़ शासकीय भूमि पर गो-अभयारण्य बनाने की योजना तैयार की गई थी। इसका उद्देश्य सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर घूमने वाले निराश्रित तथा बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना था। परियोजना के पहले चरण के लिए कलेक्टर की ओर से ₹71.43 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी।
परियोजना में फेंसिंग के लिए करीब ₹12.28 लाख, पशु शेड के लिए ₹37.20 लाख, बोरवेल के लिए ₹9.30 लाख तथा पेयजल और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए करीब ₹12.65 लाख का प्रावधान किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक पहले चरण में करीब ₹59.15 लाख का काम अभी बाकी है।
मामले में हाईकोर्ट की कार्रवाई के बाद भी निर्माण में तेजी नहीं आ सकी। 2 जून 2026 को पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग के संयुक्त संचालक ने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य शुरू कराने और कार्रवाई की योजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद परियोजना की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुई।
रिपोर्ट के अनुसार गो-अभयारण्य की स्थापना की प्रक्रिया 21 अगस्त 2024 से शुरू हुई थी। इसके बाद विभिन्न स्तरों पर प्रस्ताव, स्वीकृति और राशि जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन निर्माण कार्य में लगातार देरी होती रही। अब प्रशासन के सामने चुनौती स्वीकृत राशि का प्रभावी उपयोग करते हुए अधूरे कार्यों को जल्द पूरा कराने की है।
गो-अभयारण्य परियोजना में देरी का असर निराश्रित मवेशियों की व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। साथ ही, सरकारी धन स्वीकृत होने और न्यायालयीय हस्तक्षेप के बावजूद निर्माण में अपेक्षित प्रगति नहीं होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर भी सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों से अब शेष निर्माण कार्यों में तेजी लाने की उम्मीद है।
