राजनांदगांव, 7 अगस्त। पं. किशोरीलाल शुक्ला विधि महाविद्यालय के विद्यार्थियों को वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों, माता-पिता के भरण-पोषण और उनके कल्याण से जुड़े कानूनी प्रावधानों की व्यावहारिक जानकारी देने के उद्देश्य से वृद्धाश्रम का भ्रमण कराया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों से आत्मीय संवाद किया और उनके अनुभवों को करीब से समझने का प्रयास किया।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. निमिषा मिश्रा ने बताया कि विधि की शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को कानून के साथ-साथ पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए यह भ्रमण आयोजित किया गया। विद्यार्थियों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया गया कि कानून का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना और उनके भरण-पोषण तथा कल्याण को सुनिश्चित करना है।
वृद्धाश्रम भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने वहां निवासरत बुजुर्गों से बातचीत की, उनके जीवन के अनुभव सुने और उनके साथ समय बिताया। विद्यार्थियों के आत्मीय व्यवहार से वृद्धाश्रम के बुजुर्ग भी भावुक नजर आए। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित कानूनों का वास्तविक सामाजिक संदर्भ क्या है और परिवार तथा समाज की उनके प्रति क्या जिम्मेदारी है।
प्राचार्य डॉ. निमिषा मिश्रा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल कानूनी ज्ञान प्रदान करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में सामाजिक संवेदनशीलता, मानवीय मूल्यों और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने कहा कि कानून के विद्यार्थियों के लिए इस तरह की गतिविधियां उन्हें न्याय और अधिकारों के साथ मानवीय पक्ष को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इस मानवीय एवं शैक्षणिक भ्रमण के दौरान महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक अलका चौहान, डॉ. अतुल सोनी, सुरभि, सोनाक्षी, प्रेरणा तिवारी सहित महाविद्यालय परिवार के कर्मचारी उपस्थित रहे।
