बलौदाबाजार, 22 अगस्त। शहर के मुख्य मार्ग पर स्थित सार्वजनिक वाचनालय लंबे समय से बंद पड़ा है और देखरेख के अभाव में उसका भवन तथा वहां उपलब्ध संसाधन लगातार प्रभावित हो रहे हैं। नगर पालिका परिषद द्वारा वर्ष 2007 में शुरू किए गए इस वाचनालय को दोबारा उपयोग में लाने की मांग अब स्थानीय नागरिकों ने उठाई है। नागरिकों का कहना है कि शहर में पढ़ने और अध्ययन की सुविधाओं को मजबूत करने के लिए पुराने सार्वजनिक वाचनालयों का संरक्षण और पुनरुद्धार जरूरी है।
नगर पालिका परिषद बलौदाबाजार ने 3 अक्टूबर 2007 को बीएसएनएल कार्यालय के सामने इस सार्वजनिक वाचनालय का लोकार्पण किया था। स्थापना के समय यहां दैनिक समाचार पत्रों के साथ विभिन्न विषयों की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई थीं। पाठकों की सुविधा के लिए फर्नीचर, अलमारियों और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई थीं। इसका उद्देश्य शहरवासियों को अध्ययन, समाचार-पठन और ज्ञानवर्धक सामग्री के लिए सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराना था।
समय के साथ नियमित रख-रखाव और संचालन की व्यवस्था कमजोर होती गई और वाचनालय का उपयोग बंद हो गया। इसके बाद परिसर में ताला लगा दिया गया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, लंबे समय से बंद रहने के कारण भवन की स्थिति प्रभावित हुई है तथा वहां रखी अलमारियां और अन्य सामग्री क्षतिग्रस्त या गायब हो चुकी हैं। नागरिकों का मानना है कि यदि समय रहते इसकी देखरेख और उपयोग सुनिश्चित किया जाता तो यह स्थान आज भी शहर के विद्यार्थियों, युवाओं और आम पाठकों के लिए उपयोगी साबित हो सकता था।
वर्तमान में शहर के हाई स्कूल परिसर में जिला ग्रंथालय संचालित हो रहा है, जबकि नालंदा परिसर का निर्माण भी प्रगति पर है। ऐसे में मुख्य मार्ग पर स्थित पुराने सार्वजनिक वाचनालय भवन को अनुपयोगी छोड़ने के बजाय उसकी मरम्मत और आवश्यक सुविधाओं के साथ पुनः विकसित करने का सुझाव सामने आया है। इसे अध्ययन केंद्र, सार्वजनिक वाचनालय या सामुदायिक ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
सार्वजनिक पुस्तकालय और वाचनालय केवल किताबें रखने की जगह नहीं होते, बल्कि वे समाज में शिक्षा, जागरूकता, ज्ञान और समान अवसर को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं, शोधार्थियों और सामान्य नागरिकों को एक सुलभ अध्ययन स्थल उपलब्ध कराकर ऐसे केंद्र स्थानीय समाज के शैक्षिक विकास में योगदान दे सकते हैं। इसलिए पुराने वाचनालयों का पुनरुद्धार समाज के ज्ञानात्मक और शैक्षणिक विकास से सीधे जुड़ा विषय है।
इस संबंध में छत्तीसगढ़ लाइब्रेरी एसोसिएशन राज्य और स्थानीय निकायों को सार्वजनिक पुस्तकालयों एवं वाचनालयों के विकास, संरक्षण और बेहतर संचालन के लिए आवश्यक सहयोग और विशेषज्ञ मार्गदर्शन देने के लिए तैयार है। एसोसिएशन का मानना है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पुस्तकालय भवनों का बेहतर उपयोग कर नागरिकों के लिए अध्ययन और ज्ञान के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
छत्तीसगढ़ लाइब्रेरी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. कुंदन श्री मिश्रा सार्वजनिक पुस्तकालय आंदोलन के विशेषज्ञ के रूप में पुस्तकालयों के विकास और समाज में उनकी उपयोगिता को लगातार रेखांकित करते रहे हैं। उनके अनुसार, सार्वजनिक पुस्तकालयों को मजबूत करना केवल पुस्तकालय व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज में शिक्षा, अध्ययन संस्कृति और ज्ञान तक समान पहुंच विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका परिषद और संबंधित प्रशासन से मांग की है कि वर्ष 2007 में स्थापित इस सार्वजनिक वाचनालय का निरीक्षण कराकर भवन की स्थिति का आकलन किया जाए और आवश्यक मरम्मत के बाद इसे फिर से आम जनता के लिए खोला जाए। यदि इस पहल को जिला ग्रंथालय और प्रस्तावित नालंदा परिसर जैसी मौजूदा सुविधाओं के साथ समन्वित किया जाता है, तो बलौदाबाजार में एक मजबूत सार्वजनिक पुस्तकालय नेटवर्क विकसित करने की दिशा में यह उपयोगी कदम साबित हो सकता है।
