रायपुर, 8 अगस्त। स्कूल शिक्षा विभाग ने शासकीय स्कूलों में पदस्थ गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों, यानी लिपिक एवं भृत्य, की आवश्यकता के आधार पर कलेक्टर और कमिश्नर कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति का रास्ता खोल दिया है। प्रशासनिक कार्यों के सुचारू संचालन के लिए जिला और संभाग स्तर के कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी को देखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई है।
स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, यदि किसी कलेक्टर या कमिश्नर कार्यालय में कर्मचारियों की अत्यंत आवश्यकता है, तो संबंधित कार्यालय अपने स्वीकृत सेटअप में रिक्त पदों के विरुद्ध स्कूलों में पदस्थ लिपिक और भृत्यों की प्रतिनियुक्ति का प्रस्ताव भेज सकता है।
यह प्रस्ताव सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से स्कूल शिक्षा विभाग को भेजा जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग प्रस्ताव पर अंतिम स्तर पर विचार करेगा और आवश्यकता तथा उपलब्धता के आधार पर प्रतिनियुक्ति के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
दरअसल, विभिन्न जिलों में प्रशासनिक कार्यों के संचालन के लिए स्कूलों में पदस्थ गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को पहले से ही अस्थायी रूप से कलेक्टर और कमिश्नर कार्यालयों में संलग्न किया गया था। बाद में इन कर्मचारियों को उनके मूल शैक्षणिक संस्थानों में वापस भेजे जाने के बाद कई जिला और संभाग स्तरीय कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी के कारण प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने लगा था।
विभाग के नए आदेश में स्कूलों के हितों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा कि किसी भी मूल शैक्षणिक संस्था को पूरी तरह से कर्मचारी-विहीन न किया जाए। इसका उद्देश्य यह है कि गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की कमी के कारण स्कूलों के प्रशासनिक कामकाज और शैक्षणिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
नई व्यवस्था के तहत एक ओर जिला एवं संभाग स्तर के प्रशासनिक कार्यालयों में आवश्यकतानुसार कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी, वहीं दूसरी ओर स्कूलों में कार्यरत गैर-शैक्षणिक अमले की उपलब्धता बनाए रखने की शर्त भी लागू रहेगी।
