छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि चार साल से अधिक पुराने मामले में रिटायर्ड कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती।

JUSTICE SANJAY K. AGRAWAL, JUDGE HIGH COURT OF CHHATTISGARH

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी के खिलाफ चार साल से अधिक पुराने घटनाक्रम को लेकर विभागीय कार्यवाही शुरू करने के लिए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के नियम 79 का सहारा नहीं लिया जा सकता। जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ ने सेवानिवृत्त जेल अधीक्षक डॉ. श्याम राज सिंह से ₹1,09,975 की वसूली के राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया।

मामला वर्ष 2004-05 और 2005-06 में केंद्रीय जेल रायपुर में सामग्री खरीदी से जुड़ी कथित अनियमितताओं का था। आरोप था कि न्यूनतम निविदा स्वीकार नहीं करने से शासन को ₹1,09,975 का नुकसान हुआ। डॉ. सिंह 31 अगस्त 2010 को सेवानिवृत्त हो गए थे, जबकि उन्हें 29 मई 2013 को आरोप-पत्र जारी किया गया। बाद में 18 अक्टूबर 2019 को उक्त राशि की वसूली का आदेश दिया गया था।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पेंशन नियमों के नियम 9(2)(b)(ii) के तहत सेवानिवृत्ति के बाद ऐसी घटना को लेकर विभागीय कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती, जो कार्यवाही शुरू होने से चार साल से अधिक पुरानी हो। कोर्ट ने कहा, “Rule 79 provides a mechanism for the relaxation of rules, not for their rewriting.” यानी नियम 79 का इस्तेमाल किसी अनिवार्य वैधानिक सीमा को समाप्त करने या समय-सीमा से बाहर हो चुकी कार्यवाही को दोबारा जीवित करने के लिए नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी पाया कि वित्त विभाग की सहमति तो ली गई थी, लेकिन प्रशासनिक विभाग ने नियम 79 के तहत छूट देने के लिए आवश्यक कारण लिखित रूप से दर्ज नहीं किए थे। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के Brajendra Singh Yambem v. Union of India, Kadirkhan Ahmedkhan Pathan v. Maharashtra State Warehousing Corporation और State of U.P. v. Shri Krishna Pandey सहित अन्य फैसलों का उल्लेख करते हुए चार साल की सीमा को सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण वैधानिक सुरक्षा माना।

अंततः हाईकोर्ट ने 18 अक्टूबर 2019 का वसूली आदेश रद्द करते हुए याचिका स्वीकार कर ली। यह फैसला स्पष्ट करता है कि सरकार सामान्य नियम-शिथिलीकरण की शक्ति का इस्तेमाल करके सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की अनिवार्य चार साल की वैधानिक सीमा को नहीं बढ़ा सकती।