छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जारी किया नया रोस्टर, 21 अगस्त 2026 से लागू होंगी पीठों की नई जिम्मेदारियां

High Court of Chhattisgarh - Bilaspur

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर ने विभिन्न मामलों की सुनवाई के लिए नया रोस्टर जारी किया है। हाईकोर्ट द्वारा 18 अगस्त 2026 को जारी रोस्टर के अनुसार नई व्यवस्था 21 अगस्त 2026 से प्रभावी होकर आगामी आदेश तक लागू रहेगी। रोस्टर में डिवीजन बेंच और सिंगल बेंच के बीच विभिन्न प्रकार के आपराधिक, सिविल, रिट, अपील, जमानत और अन्य मामलों के आवंटन का निर्धारण किया गया है।

नए रोस्टर के तहत डिवीजन बेंच-I में माननीय मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की पीठ को डिवीजन बेंच के सभी रिट मामलों, जनहित याचिकाओं, रिट अपीलों, हेबियस कॉर्पस याचिकाओं, क्रिमिनल रेफरेंस, वर्ष 2021 से आगे की क्रिमिनल अपीलों, क्रिमिनल रिट याचिकाओं तथा अन्य निर्धारित मामलों की जिम्मेदारी दी गई है। इस पीठ के समक्ष वर्ष 2020 की क्रिमिनल अपीलों की मोशन हियरिंग और वर्ष 2015 तक की एक्विटल अपीलें भी सूचीबद्ध रहेंगी।

डिवीजन बेंच-II में न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल की पीठ को ऐसे आपराधिक मामले सौंपे गए हैं जो किसी अन्य डिवीजन बेंच को आवंटित नहीं किए गए हैं। इसके अलावा वर्ष 2016 से आगे की एक्विटल अपीलें तथा वर्ष 2022 तक के अल्ट्रा वायर्स मामलों की सुनवाई भी इस पीठ द्वारा की जाएगी।

वहीं डिवीजन बेंच-III में न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू और न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की पीठ को डिवीजन बेंच के ऐसे सभी सिविल मामलों की जिम्मेदारी दी गई है जो किसी अन्य पीठ को आवंटित नहीं किए गए हैं। कंपनी अपील, वैवाहिक मामलों से संबंधित प्रथम अपील, कर मामलों सहित रिट अपील तथा कमर्शियल अपीलेट डिवीजन बेंच के मामले भी इस पीठ के अधिकार क्षेत्र में रहेंगे।

सिंगल बेंच के स्तर पर भी मामलों का विस्तृत आवंटन किया गया है। स्पेशल बेंच में मुख्य न्यायाधीश को मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम से संबंधित निर्धारित आवेदन, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 के तहत याचिकाएं, वर्ष 2016 तक की क्रिमिनल रिवीजन, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 482 के तहत जमानत आवेदन तथा अन्य विशेष रूप से आवंटित मामलों की सुनवाई करनी होगी।

न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल की सिंगल बेंच-I को वर्ष 2019 और 2020 की सेवा संबंधी रिट याचिकाएं, वर्ष 2020 से 2021 की सिविल रिट याचिकाएं, मोटर वाहन अधिनियम से संबंधित वर्ष 2019 और 2020 की विविध अपीलें तथा टाई-अप मामले सौंपे गए हैं। न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू की सिंगल बेंच-II को वर्ष 2022 तक के सिविल अवमानना मामलों, वर्ष 2020 से 2021 की सिविल रिट याचिकाओं और टाई-अप मामलों की सुनवाई करनी होगी।

न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच-III को गंभीर आपराधिक मामलों से संबंधित जमानत आवेदन, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपील, वर्ष 2017 से आगे की क्रिमिनल रिवीजन, धारा 482 सीआरपीसी तथा धारा 528 बीएनएसएस से संबंधित याचिकाएं और विभिन्न अवधि की क्रिमिनल अपीलें आवंटित की गई हैं।

न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की सिंगल बेंच-IV को वर्ष 2021 से आगे की सिविल रिवीजन, वर्ष 2023 की सेवा संबंधी रिट याचिकाएं, सिविल ट्रांसफर याचिकाएं, अन्य अनिर्धारित सिविल मामले, क्रिमिनल रेफरेंस तथा टाई-अप मामले सौंपे गए हैं। न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की सिंगल बेंच-V सेकंड अपील, प्रथम अपील और वर्ष 2020 तक की सिविल रिवीजन की सुनवाई करेगी।

इसके अतिरिक्त न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की सिंगल बेंच-VI को वर्ष 2017-2018 तथा वर्ष 2021-2022 की सेवा संबंधी रिट याचिकाएं, रिट पिटीशन (एल), रिट पिटीशन (टी) और टाई-अप मामले दिए गए हैं। न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल की सिंगल बेंच-VII को एक्विटल के विरुद्ध क्रिमिनल रिवीजन, वर्ष 2023 तक की एक्विटल अपील और लीव टू अपील तथा वर्ष 2006 से 2010 की क्रिमिनल अपीलों की सुनवाई करनी होगी।

न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल की सिंगल बेंच-VIII को मोटर वाहन अधिनियम से संबंधित वर्ष 2018 तक तथा वर्ष 2021 से आगे की विविध अपीलें आवंटित की गई हैं। न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की स्पेशल बेंच को वर्ष 2024 से आगे की एक्विटल अपील और लीव टू अपील, वर्ष 2006 तक की सभी प्रकार की रिट याचिकाएं, वर्ष 2016 तक की सेवा संबंधी रिट याचिकाएं तथा संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत याचिकाएं सौंपी गई हैं।

न्यायमूर्ति विभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच-IX वर्ष 2024 से आगे की सेवा संबंधी रिट याचिकाओं, वर्ष 2019 तक की सिविल रिट याचिकाओं और वर्ष 2023 से आगे के सिविल अवमानना मामलों की सुनवाई करेगी। वहीं न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच-X को वर्ष 2022 से आगे की सिविल रिट याचिकाएं और टाई-अप मामले आवंटित किए गए हैं।

हाईकोर्ट के 18 अगस्त 2026 के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कुछ पीठों के लिए दोपहर 2:15 बजे से अथवा संबंधित डिवीजन बेंच की सूची पूरी होने के बाद, जो भी पहले हो, के आधार पर निर्धारित मामलों की सुनवाई की जाएगी। इससे दिन के दूसरे हिस्से में मामलों के सुनियोजित आवंटन और सुनवाई की व्यवस्था सुनिश्चित होती है।

रोस्टर की प्रति हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्रारों, संयुक्त रजिस्ट्रारों, अतिरिक्त रजिस्ट्रारों, महाधिवक्ता, उप सॉलिसिटर जनरल, हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन तथा संबंधित न्यायिक और प्रशासनिक शाखाओं को भेजी गई है। हाईकोर्ट के ओआईसी-एनआईसी को इसे इंटरनेट पर अपलोड करने के लिए भी निर्देशित किया गया है।

यह नया रोस्टर अधिवक्ताओं और पक्षकारों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि 21 अगस्त 2026 से संबंधित मामलों की सुनवाई निर्धारित पीठों के समक्ष होगी। इसलिए लंबित मामलों में पेश होने वाले अधिवक्ताओं और पक्षकारों के लिए नई रोस्टर व्यवस्था के अनुसार केस लिस्ट और संबंधित पीठ की जानकारी देखना आवश्यक होगा।