12 साल तक सामाजिक बहिष्कार झेलने वाली बुजुर्ग महिला की मौत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सख्त, ओडिशा सरकार से मांगी रिपोर्ट

National Human Rights Commission

भुवनेश्वर/सुंदरगढ़: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के महुलडीहा गांव में एक बुजुर्ग महिला की मौत और उनके परिवार के 12 वर्षों तक कथित सामाजिक बहिष्कार का सामना करने के मामले में स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लिया है। आयोग ने इस मामले को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ा मानते हुए ओडिशा के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बुजुर्ग महिला का परिवार पिछले 12 वर्षों से गांव में सामाजिक बहिष्कार का शिकार था। बताया गया है कि महिला की बेटी कुछ समय के लिए दूसरे जाति के एक युवक के साथ घर छोड़कर चली गई थी। इसके बाद ग्रामीणों ने परिवार पर जुर्माना लगाया था। परिवार जुर्माने की राशि अदा नहीं कर सका, जिसके चलते उन्हें सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस बहिष्कार का असर परिवार के सामाजिक और आर्थिक जीवन पर लंबे समय तक पड़ा। हालात तब और गंभीर हो गए जब बुजुर्ग महिला का निधन हो गया और गांव के लोगों ने उनकी बेटी को अंतिम संस्कार कराने में भी सहयोग देने से इनकार कर दिया।

स्थिति की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन ने हस्तक्षेप किया। प्रशासन और कुछ स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की मदद से महिला का अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपने अवलोकन में कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्ट में वर्णित तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है। आयोग अब राज्य सरकार से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।

यह मामला सामाजिक बहिष्कार, जातिगत भेदभाव और मानव गरिमा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को सामने लाता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की पहल से इस घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है।