आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण ने EbixCash को दी बड़ी राहत, ₹76.45 करोड़ का ट्रांसफर प्राइसिंग एडिशन रद्द; कहा- CCD को इक्विटी नहीं माना जा सकता

Judgement and Order

मुंबई आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने EbixCash World Money Limited को बड़ी राहत देते हुए ₹76.45 करोड़ के ट्रांसफर प्राइसिंग एडिशन को रद्द कर दिया है। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि Compulsorily Convertible Debentures (CCDs) को केवल इस आधार पर इक्विटी नहीं माना जा सकता कि वे भविष्य में शेयरों में परिवर्तित होने वाले हैं। इसलिए ऐसे CCDs पर भुगतान किए गए ब्याज को ट्रांसफर प्राइसिंग नियमों के तहत शून्य नहीं माना जा सकता।

यह मामला आकलन वर्ष 2022-23 से संबंधित है। EbixCash World Money Limited, जो विदेशी मुद्रा विनिमय और मनी एक्सचेंज सेवाओं का कारोबार करती है तथा भारतीय रिजर्व बैंक से अधिकृत है, ने अपने संबद्ध उद्यम (Associated Enterprise) के साथ किए गए अंतरराष्ट्रीय लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को दी थी। कंपनी ने मॉरीशस स्थित अपनी संबद्ध इकाई Ebix Asia Holding Inc. को जारी किए गए CCDs पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान किया था।

ट्रांसफर प्राइसिंग अधिकारी (TPO) ने यह कहते हुए ब्याज भुगतान को चुनौती दी कि CCDs की वास्तविक प्रकृति ऋण नहीं बल्कि इक्विटी जैसी है। विभाग का तर्क था कि चूंकि ये डिबेंचर अनिवार्य रूप से भविष्य में शेयरों में परिवर्तित होने वाले थे और इनके मूलधन की वापसी का प्रावधान नहीं था, इसलिए इन्हें ऋण साधन नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर TPO ने ब्याज भुगतान का Arm’s Length Price (ALP) शून्य निर्धारित कर दिया और ₹76.45 करोड़ का ट्रांसफर प्राइसिंग समायोजन कर दिया।

कंपनी ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा कि CCDs वैध ऋण साधन हैं और इनके जारी होने की शर्तों के अनुसार ब्याज भुगतान अनिवार्य था। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि TPO ने उसके द्वारा प्रस्तुत ट्रांसफर प्राइसिंग अध्ययन और बेंचमार्किंग विश्लेषण को खारिज किए बिना ही मनमाने तरीके से ALP को शून्य निर्धारित कर दिया।

मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी ने कई न्यायिक निर्णयों का हवाला दिया, जिनमें विभिन्न ITAT बेंचों और उच्च न्यायालयों के फैसले शामिल थे। इन निर्णयों में लगातार यह माना गया है कि CCDs को इक्विटी के रूप में पुनर्वर्गीकृत नहीं किया जा सकता और उन पर दिए गए ब्याज को केवल इस आधार पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि भविष्य में उनका रूपांतरण शेयरों में होना है।

ITAT ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों और पूर्व न्यायिक मिसालों का विश्लेषण करते हुए पाया कि विभाग ने CCDs की कानूनी प्रकृति को नजरअंदाज कर उन्हें इक्विटी मान लिया। न्यायाधिकरण ने कहा कि “CCDs को इक्विटी नहीं माना जा सकता और उन पर दिए गए ब्याज को केवल पुनर्वर्गीकरण के आधार पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता।”

न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि ट्रांसफर प्राइसिंग समायोजन करने के लिए आयकर अधिनियम की धारा 92C और 92CA के तहत निर्धारित विधियों का पालन करना आवश्यक है। बिना किसी तुलनीय लेनदेन की पहचान किए और बिना FAR (Functions, Assets and Risks) विश्लेषण किए ALP को शून्य निर्धारित करना कानूनन उचित नहीं है।

पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के HDFC Bank मामले सहित कई महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख किया, जिनमें यह माना गया था कि परिवर्तनीय डिबेंचरों से संबंधित व्यय और ब्याज को ऋण संबंधी व्यय माना जाएगा, भले ही बाद में उनका रूपांतरण इक्विटी में हो जाए।

इस फैसले को बहुराष्ट्रीय कंपनियों, विदेशी निवेशकों और CCDs के माध्यम से वित्तपोषण करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि कर अधिकारी केवल आर्थिक व्याख्या के आधार पर किसी वैध वित्तीय साधन की कानूनी प्रकृति को बदलकर ट्रांसफर प्राइसिंग समायोजन नहीं कर सकते।

अंततः ITAT ने कंपनी की अपील स्वीकार करते हुए आकलन अधिकारी और TPO को निर्देश दिया कि CCDs पर ब्याज भुगतान के संबंध में किया गया ₹76.45 करोड़ का पूरा ट्रांसफर प्राइसिंग एडिशन हटाया जाए।