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उपभोक्ता आयोग ने ICICI बैंक को खाते से ₹34.90 लाख का लियन हटाने और मुआवजा देने का आदेश दिया।

Posted on 10.06.202616.06.2026 by Editor-in-Chief
Consumer Protection

हरियाणा के कैथल जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ICICI बैंक को ग्राहक के बचत खाते पर बिना पर्याप्त आधार के ₹34.90 लाख का लियन लगाने के लिए सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) का दोषी ठहराया है। आयोग ने बैंक को तत्काल लियन हटाने, ₹15,000 मुआवजा और ₹5,000 मुकदमा खर्च अदा करने का निर्देश दिया है।

मामला शैलि सिक्का द्वारा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत दायर शिकायत से जुड़ा था। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह ICICI बैंक में बचत खाता संचालित करती हैं। 12 दिसंबर 2025 को चिकित्सा संबंधी आवश्यकता के लिए ऑनलाइन लेनदेन करने का प्रयास किया गया, लेकिन ट्रांजैक्शन असफल हो गया। खाते की जांच करने पर उन्हें पता चला कि बैंक ने उनके खाते में ₹34.90 लाख की राशि पर लियन लगा दिया है, जिसके कारण वह रकम उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं थी।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने बैंक शाखा से संपर्क किया, जहां उन्हें बताया गया कि खाता कथित धोखाधड़ी विवाद (Fraud Dispute) के कारण लियन के अधीन है और शाखा स्तर पर इसे हटाया नहीं जा सकता। उन्होंने बैंक से लियन लगाने का कारण, किसी FIR या पुलिस शिकायत की जानकारी और संबंधित दस्तावेज मांगे, लेकिन बैंक की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।

दूसरी ओर, ICICI बैंक ने आयोग के समक्ष कहा कि 23 नवंबर 2025 को शिकायतकर्ता के खाते में उनकी बहन शिल्पा विज द्वारा NEFT के माध्यम से ₹34.90 लाख भेजे गए थे। बैंक का दावा था कि बाद में प्रेषक (Remitter) ने इस लेनदेन को विवादित बताया और ग्राहक सेवा केंद्र पर शिकायत दर्ज कराई। बैंक के अनुसार, इसी शिकायत के आधार पर विवादित राशि पर एहतियाती कदम के रूप में लियन लगाया गया।

हालांकि आयोग ने बैंक के दावों की गहन जांच के बाद पाया कि बैंक अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं कर सका। बैंक यह साबित नहीं कर पाया कि प्रेषक ने वास्तव में ग्राहक सेवा केंद्र पर शिकायत दर्ज कराई थी। न तो कोई कॉल रिकॉर्ड प्रस्तुत किया गया और न ही शिकायत का कोई दस्तावेज आयोग के समक्ष रखा गया।

आयोग ने यह भी पाया कि बैंक किसी FIR, पुलिस शिकायत, साइबर सेल शिकायत या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायत का रिकॉर्ड पेश करने में असफल रहा। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि बैंक को धोखाधड़ी का संदेह था तो उसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था।

फैसले में आयोग ने कहा कि बैंक ने यह भी साबित नहीं किया कि लियन लगाने के लिए उसकी आंतरिक प्रक्रियाएं और दिशानिर्देश क्या थे। बैंक द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में कई कमियां पाई गईं और आयोग ने उन्हें पर्याप्त नहीं माना।

आयोग ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा, “बैंक ने RBI द्वारा जारी प्रक्रिया और दिशानिर्देशों का पालन किए बिना शिकायतकर्ता के खाते पर मनमाने ढंग से लियन लगा दिया।” आयोग ने आगे कहा कि किसी पुलिस शिकायत, साइबर शिकायत या FIR के अभाव में बैंक की कार्रवाई अनुचित थी और इससे उपभोक्ता को आर्थिक नुकसान, मानसिक पीड़ा और अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ा।

फैसले में यह भी रेखांकित किया गया कि बैंक जांच एजेंसियों का स्थान नहीं ले सकते। यदि किसी लेनदेन को लेकर धोखाधड़ी की आशंका हो तो बैंक को संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों और नियामकीय प्रक्रिया का सहारा लेना चाहिए, न कि केवल अपने स्तर पर ग्राहक के धन को रोक देना चाहिए।

आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि ICICI बैंक द्वारा लगाया गया लियन गलत और अवैध था। इसके चलते बैंक को शिकायतकर्ता के खाते से तत्काल प्रभाव से लियन हटाने का निर्देश दिया गया। साथ ही बैंक को मानसिक उत्पीड़न और असुविधा के लिए ₹15,000 मुआवजा तथा ₹5,000 मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया गया। आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करना होगा, अन्यथा मुआवजा राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा।

यह फैसला बैंकिंग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे स्पष्ट संदेश जाता है कि बिना कानूनी आधार, पर्याप्त साक्ष्य और RBI दिशानिर्देशों का पालन किए किसी ग्राहक के खाते को फ्रीज करना या उस पर लियन लगाना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है। यह निर्णय भविष्य में बैंक खातों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों और लियन संबंधी विवादों में एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में देखा जा सकता है।

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