आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण का फैसला: जेट लाइट पर फ्रिंज बेनिफिट टैक्स बरकरार, ₹3.82 करोड़ की पेनल्टी रद्द

The Rajpatra Law

आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) की दिल्ली पीठ ने जेट लाइट (इंडिया) लिमिटेड से जुड़े वर्षों पुराने कर विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कंपनी पर लगाए गए फ्रिंज बेनिफिट टैक्स (FBT) आकलन को बरकरार रखा है। हालांकि, न्यायाधिकरण ने आयकर विभाग की ₹3.82 करोड़ से अधिक की पेनल्टी बहाल करने की मांग को खारिज कर दिया।

मामला आकलन वर्ष 2007-08 और 2008-09 से संबंधित था। आयकर विभाग ने कर्मचारियों को दिए गए मुफ्त या रियायती हवाई टिकट, आतिथ्य व्यय, यात्रा एवं परिवहन खर्च तथा होटल बोर्डिंग-लॉजिंग खर्च को फ्रिंज बेनिफिट मानते हुए कर योग्य घोषित किया था। विशेष ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर किए गए इस आकलन को आयुक्त (अपील) ने भी सही ठहराया था।

ITAT ने माना कि आयकर अधिनियम की धारा 115WB के तहत ये खर्च फ्रिंज बेनिफिट की श्रेणी में आते हैं और इस कारण कंपनी की कर संबंधी अपीलें खारिज कर दी गईं।

दूसरी ओर, विभाग ने यह आरोप लगाते हुए कंपनी पर धारा 271(1)(d) के तहत ₹3.82 करोड़ से अधिक की पेनल्टी लगाई थी कि उसने फ्रिंज बेनिफिट से जुड़ी सही जानकारी नहीं दी। लेकिन न्यायाधिकरण ने पाया कि कंपनी ने अपने खातों और टैक्स ऑडिट रिपोर्ट में सभी संबंधित तथ्यों का खुलासा किया था तथा विवाद मुख्य रूप से कानून की व्याख्या से जुड़ा था।

पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के Reliance Petroproducts फैसले का हवाला देते हुए कहा कि केवल किसी कानूनी दावे के अस्वीकार हो जाने से उसे “गलत विवरण” या “आय छिपाने” का मामला नहीं माना जा सकता। जब करदाता ने सभी तथ्य सामने रखे हों, तब पेनल्टी नहीं लगाई जा सकती।

इसी आधार पर ITAT ने विभाग की पेनल्टी संबंधी अपीलें भी खारिज कर दीं। यह फैसला करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे स्पष्ट होता है कि कर विवाद में हार जाने मात्र से पेनल्टी स्वतः नहीं लगती, जब तक कि तथ्य छिपाने या गलत जानकारी देने का प्रमाण न हो।