हर्षित नियो सिटी विवाद: अधूरी सुविधाओं और सिंकिंग फंड को लेकर रेरा पहुंची आवासीय सोसायटी

RERA - Real Estate Regulatory Authority

रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (RERA) के समक्ष हरशित नियो सिटी रेसिडेंशियल को-ऑपरेटिव सोसायटी मर्यादित और परियोजना के प्रवर्तकों के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। प्राधिकरण ने 10 जून 2026 को पारित आदेश में सोसायटी द्वारा उठाए गए अनेक मुद्दों, डेवलपर के जवाब और रेरा अधिनियम के तहत पक्षकारों के अधिकारों एवं दायित्वों पर विस्तार से विचार किया।

मामला दुर्ग जिले के अमलेश्वर स्थित “हरशित नियो सिटी” आवासीय परियोजना से जुड़ा है, जो रेरा में पंजीकृत परियोजना है। शिकायतकर्ता सोसायटी ने रेरा अधिनियम, 2016 की धारा 31 के तहत याचिका दायर कर आरोप लगाया कि परियोजना के खरीदारों को बिक्री के समय जिन सुविधाओं और अवसंरचनात्मक विकास का आश्वासन दिया गया था, उनमें से अनेक आज तक पूर्ण नहीं किए गए हैं। सोसायटी का कहना था कि परियोजना के ब्रॉशर, विज्ञापनों और स्वीकृत ले-आउट में आधुनिक प्रवेश द्वार, चौड़ी सड़कें, पार्क, क्लब हाउस, खेल सुविधाएं, जल निकासी व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, स्कूल, अस्पताल तथा अन्य सामुदायिक सुविधाओं का उल्लेख किया गया था, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे भिन्न है।

शिकायत में यह भी कहा गया कि कॉलोनी में सुरक्षा व्यवस्था, बाउंड्री वॉल, पेयजल आपूर्ति, पर्याप्त बोरवेल, ट्रांसफॉर्मर क्षमता, रखरखाव और कई अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर कमियां हैं। सोसायटी ने आरोप लगाया कि परियोजना के निवासियों से संकलित सिंकिंग फंड की राशि भी डेवलपर द्वारा विधिवत हस्तांतरित नहीं की गई। इसके अतिरिक्त, डेवलपर पर परियोजना के साझा क्षेत्रों के हस्तांतरण तथा रेरा अधिनियम की विभिन्न वैधानिक आवश्यकताओं का पालन नहीं करने का आरोप लगाया गया।

सोसायटी ने रेरा से मांग की कि परियोजना में वादा की गई सभी सुविधाओं का विकास कराया जाए, सुरक्षित पेयजल और अन्य मूलभूत सेवाएं सुनिश्चित की जाएं, सिंकिंग फंड और रखरखाव से संबंधित राशि सोसायटी को सौंपी जाए तथा रेरा अधिनियम की धाराओं 59, 60 और 61 के तहत प्रवर्तक पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। शिकायत में मानसिक पीड़ा और कथित उत्पीड़न के लिए क्षतिपूर्ति की मांग भी की गई।

दूसरी ओर, डेवलपर और उसके प्रतिनिधियों ने सभी प्रमुख आरोपों का विरोध किया। उनका कहना था कि परियोजना का विकास स्वीकृत ले-आउट और सक्षम प्राधिकरणों की मंजूरी के अनुरूप किया गया है तथा 21 नवंबर 2022 को परियोजना को पूर्णता प्रमाणपत्र (Completion Certificate) जारी किया जा चुका है। डेवलपर का तर्क था कि परियोजना में आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं और वर्तमान में रखरखाव का दायित्व सोसायटी के पास है, जो स्वयं निवासियों से रखरखाव शुल्क भी वसूल रही है।

डेवलपर ने यह भी कहा कि शिकायत में जिन सुविधाओं जैसे स्कूल, अस्पताल, मिनी गोल्फ, पुस्तकालय, खेल सुविधाओं या अन्य विकास कार्यों का उल्लेख किया गया है, उनमें से कई प्रस्तावित प्रकृति की थीं और उनकी स्थापना मांग, व्यवहार्यता तथा आवश्यक अनुमतियों पर निर्भर थी। उनका दावा था कि परियोजना से संबंधित आवश्यक जानकारियां रेरा पोर्टल पर अपलोड की गई थीं तथा निवासियों की विभिन्न शिकायतों के समाधान के लिए समय-समय पर कदम भी उठाए गए।

मामले की कानूनी दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विवाद केवल निर्माण गुणवत्ता या अधूरी सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि रेरा अधिनियम, 2016 के तहत प्रवर्तकों की वैधानिक जिम्मेदारियों, साझा क्षेत्रों के हस्तांतरण, रखरखाव दायित्व, सिंकिंग फंड के प्रबंधन और खरीदारों को दिए गए वादों की जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। रेरा अधिनियम की धारा 11 प्रवर्तकों के कर्तव्यों, धारा 17 परियोजना के साझा क्षेत्रों के हस्तांतरण तथा धारा 31 शिकायत प्रस्तुत करने के अधिकार से संबंधित है। वहीं, धाराएं 59 से 61 विभिन्न प्रकार के उल्लंघनों पर दंड का प्रावधान करती हैं।

यह मामला उन हजारों गृह खरीदारों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो रियल एस्टेट परियोजनाओं में विज्ञापित सुविधाओं और वास्तविक विकास के बीच अंतर को लेकर कानूनी उपाय तलाशते हैं। यदि किसी परियोजना में वादा की गई सुविधाएं समय पर उपलब्ध नहीं कराई जातीं या साझा संपत्तियों का विधिसम्मत हस्तांतरण नहीं होता, तो ऐसे विवाद रेरा के समक्ष व्यापक नियामकीय जांच का विषय बन सकते हैं।

रेरा के समक्ष प्रस्तुत इस विवाद ने एक बार फिर यह प्रश्न प्रमुखता से उठाया है कि परियोजना के विपणन के दौरान किए गए आश्वासनों और वास्तविक विकास कार्यों के बीच सामंजस्य सुनिश्चित करना प्रवर्तकों की कानूनी जिम्मेदारी है, जबकि खरीदारों और उनकी सोसायटियों को भी अपने अधिकारों के संरक्षण के लिए नियामकीय मंचों का प्रभावी उपयोग करना होगा।