राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने Canara Bank द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए HK Toll Road Private Limited के खिलाफ कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) शुरू करने का आदेश दिया है। यह मामला ₹282.59 करोड़ से अधिक के वित्तीय डिफॉल्ट से जुड़ा है और देश की प्रमुख सड़क अवसंरचना परियोजनाओं में से एक पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
HK Toll Road Private Limited, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर समूह द्वारा प्रवर्तित एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) है, जिसे तमिलनाडु में होसुर-क्रिश्नागिरि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के निर्माण, संचालन और रखरखाव का कार्य सौंपा गया था। परियोजना के लिए Canara Bank के नेतृत्व वाले बैंकिंग कंसोर्टियम ने लगभग ₹555 करोड़ का वित्तपोषण किया था, जिसमें Canara Bank की हिस्सेदारी ₹310 करोड़ थी।
बैंक के अनुसार कंपनी ने ऋण पुनर्भुगतान में चूक की और उसका खाता 30 मार्च 2024 को एनपीए घोषित कर दिया गया। Canara Bank ने दावा किया कि 28 फरवरी 2025 तक कुल बकाया राशि ₹282.59 करोड़ से अधिक हो गई थी, जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल हैं। इसके बाद बैंक ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (IBC) की धारा 7 के तहत NCLT का दरवाजा खटखटाया।
दूसरी ओर HK Toll Road ने दलील दी कि उसकी वित्तीय कठिनाइयों का कारण व्यवसायिक विफलता नहीं, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा रियायत समझौते (Concession Agreement) को समाप्त किया जाना है। कंपनी का कहना था कि टोल संग्रह से होने वाली आय ही ऋण भुगतान का मुख्य स्रोत थी और NHAI की कार्रवाई के बाद यह आय बंद हो गई, जिसके कारण भुगतान प्रभावित हुआ।
कंपनी ने यह भी बताया कि उसने NHAI के खिलाफ मध्यस्थता (Arbitration) कार्यवाही शुरू की है और मामले से जुड़ी याचिकाएं उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं। HK Toll Road का दावा था कि यदि उसे मध्यस्थता या अन्य कानूनी कार्यवाहियों में सफलता मिलती है तो उसे सैकड़ों करोड़ रुपये की टर्मिनेशन पेमेंट प्राप्त हो सकती है, जिससे वह अपने सभी ऋणों का भुगतान करने में सक्षम होगी।
मामले के दौरान कंपनी ने Canara Bank पर IBC की धारा 65 के तहत दुर्भावनापूर्ण तरीके से दिवाला याचिका दायर करने का आरोप भी लगाया और याचिका खारिज करने की मांग की। हालांकि, NCLT ने रिकॉर्ड पर मौजूद ऋण दस्तावेजों, बैंक खातों, डिफॉल्ट रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण करने के बाद माना कि वित्तीय ऋण और डिफॉल्ट प्रथम दृष्टया स्थापित होता है।
यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि NCLT ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि समानांतर मध्यस्थता या अन्य न्यायिक कार्यवाहियां लंबित हैं, वित्तीय लेनदार के IBC के तहत उपलब्ध अधिकार समाप्त नहीं हो जाते। यदि ऋण और डिफॉल्ट साबित हो जाता है तो दिवाला कार्यवाही शुरू की जा सकती है।
इस आदेश के बाद HK Toll Road पर IBC के तहत मोरेटोरियम लागू होगा और कंपनी का प्रबंधन अंतरिम समाधान पेशेवर (IRP) की निगरानी में जाएगा। साथ ही, यह मामला अवसंरचना क्षेत्र की उन परियोजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है जहां सरकारी एजेंसियों, रियायत समझौतों और बैंकिंग ऋणों से जुड़े विवाद एक साथ चल रहे हैं।
