भीमा कोरेगांव मामले में वर्नन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा की जमानत रद्द कराने अदालत पहुंची राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)

The Rajpatra Law

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले के आरोपित वर्नन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा की जमानत रद्द करने के लिए मुंबई की विशेष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। एजेंसी का आरोप है कि दोनों ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है।

विशेष NIA न्यायाधीश चकोर एस. बाविस्कर ने बुधवार को दोनों आरोपितों को NIA की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 19 जून को निर्धारित की।

NIA के अनुसार, वर्नन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा ने 19 जनवरी को मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था, जहां भीमा कोरेगांव मामले के अन्य आरोपित भी मौजूद थे। एजेंसी का कहना है कि इस कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति जमानत की शर्तों के विपरीत है। इसी आधार पर NIA ने इससे पहले अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज तथा वरिष्ठ कवि वरवरा राव की जमानत रद्द करने की भी मांग की थी। वह याचिका अभी अदालत में लंबित है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने दो फरार आरोपितों, प्रकाश उर्फ नवीन उर्फ ऋतुपन गोस्वामी और गणपति उर्फ मुपल्ला लक्ष्मण राव, के खिलाफ उद्घोषणा जारी करने संबंधी NIA की अर्जी भी मंजूर कर ली। यह कार्रवाई आपराधिक कानून के तहत घोषित अपराधियों के विरुद्ध की जाती है।

19 जून को अदालत मामले से जुड़ी कई अन्य लंबित अर्जियों पर भी सुनवाई करेगी। इनमें आरोपितों की डिस्चार्ज याचिकाएं, जमानत शर्तों में संशोधन के आवेदन, जेल सुविधाओं से जुड़े मुद्दे, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से संबंधित विवाद और यात्रा की अनुमति मांगने वाली याचिकाएं शामिल हैं।

भीमा कोरेगांव मामला 1 जनवरी 2018 को पुणे के निकट हुई हिंसा और उसके पीछे कथित व्यापक साजिश से जुड़ा है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि मामले के आरोपितों के प्रतिबंधित माओवादी संगठन से संबंध थे। इस मामले में कुल 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें से नौ को वर्ष 2018 में पुणे पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जबकि सात अन्य को बाद में NIA ने गिरफ्तार किया।

मामले के आरोपितों में जेसुइट पादरी और आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी भी शामिल थे, जिनका वर्ष 2021 में न्यायिक हिरासत के दौरान निधन हो गया था।

वर्तमान में मामले के सभी जीवित आरोपितों को सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। हालांकि, अब तक आरोप तय नहीं किए गए हैं और मुकदमे की सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है, क्योंकि अदालत आरोपितों की विभिन्न डिस्चार्ज याचिकाओं पर विचार कर रही है।