भिलाई में बेदखली आदेश पर हाई कोर्ट की रोक, बिना पक्षकार बनाए कार्रवाई पर उठाए सवाल

High Court of Chhattisgarh - Bilaspur

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दुर्ग जिले के भिलाई-3 क्षेत्र में भूमि विवाद से जुड़े एक मामले में तहसीलदार द्वारा जारी बेदखली आदेश और नोटिस के अमल पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया प्रक्रिया में खामी पाते हुए संबंधित गृह निर्माण सहकारी समिति को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है तथा अगली सुनवाई तक प्रशासन को किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक दिया है।

मामला भिलाई-3 चरौदा तहसील के पदुम नगर स्थित भूमि से संबंधित है। याचिकाकर्ता वर्मा ने अधिवक्ता के माध्यम से दायर याचिका में बताया कि उन्होंने खसरा नंबर 396/287 की 1526 वर्गफीट भूमि खरीदी थी। यह भूमि मूल रूप से छत्तीसगढ़ विकास गृह निर्माण सहकारी मर्यादित समिति के स्वामित्व में थी। समिति ने नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से स्वीकृत ले-आउट प्राप्त कर आवासीय प्लॉट विकसित किए थे।

JUSTICE N. K. CHANDRAVANSHI, JUDGE HIGH COURT OF CHHATTISGARH
JUSTICE N. K. CHANDRAVANSHI, JUDGE HIGH COURT OF CHHATTISGARH

याचिका में कहा गया कि इसके बावजूद भिलाई-3 तहसीलदार ने 19 मई 2026 को पारित आदेश में याचिकाकर्ता को खसरा नंबर 398 की शासकीय भूमि का अतिक्रमणकारी घोषित कर दिया और आवास खाली कराने के लिए बेदखली नोटिस जारी कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि विवादित भूमि सहकारी समिति के स्वीकृत ले-आउट का हिस्सा है, लेकिन संबंधित समिति को पक्षकार बनाए बिना ही एकतरफा कार्रवाई कर दी गई।

ग्रीष्मकालीन अवकाशकालीन एकलपीठ के न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि आदेश में गृह निर्माण समिति को पक्षकार बनाए जाने का कोई उल्लेख नहीं है। कोर्ट ने कहा कि संबंधित पक्ष को सुने बिना की गई कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत प्रतीत होती है। इस आधार पर अदालत ने बेदखली आदेश और नोटिस के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाते हुए अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।