सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा से जुड़े जनहित याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चार सप्ताह के भीतर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने यह आदेश तब दिया, जब न्यायालय को बताया गया कि अब तक केवल चार राज्यों ने ही पूर्व में जारी निर्देशों का पालन करते हुए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता आत्माराम नाडकर्णी ने बताया कि कई राज्यों ने अपने हलफनामे केवल एक दिन पहले दाखिल किए हैं। उन्होंने सभी दस्तावेजों का परीक्षण कर एक समेकित स्थिति रिपोर्ट तैयार करने के लिए समय देने का अनुरोध किया। इस पर पीठ ने कहा कि सड़क सुरक्षा को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं और वर्तमान कार्यवाही का उद्देश्य केवल उनके प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने एमिकस क्यूरी को निर्देश दिया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त जवाबों का विश्लेषण कर एक समेकित रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाए कि न्यायालय के कौन-कौन से निर्देश लागू किए जा चुके हैं और किनका पालन अभी शेष है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे बढ़ते अतिक्रमण और सड़क के किनारों पर भारी वाहनों की अवैध पार्किंग पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। न्यायालय ने कहा कि ऐसे अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के कारण वाहन चालकों को मुख्य सड़क पर आने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है और राजमार्गों के निर्माण का मूल उद्देश्य प्रभावित होता है।
इसके अलावा न्यायालय ने सड़क सुरक्षा से जुड़े अन्य लंबित आवेदनों पर भी विचार किया। इनमें सभी वाहनों में रिवर्स पार्किंग सेंसर और कैमरे अनिवार्य करने तथा शराब पीकर वाहन चलाने के मामलों में कानून का और अधिक कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की मांग शामिल है। पीठ ने संकेत दिया कि इन सभी मुद्दों पर सड़क सुरक्षा से संबंधित लंबित मामलों के साथ ही विचार किया जाएगा।
अब इस मामले की अगली सुनवाई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अनुपालन हलफनामे दाखिल करने तथा एमिकस क्यूरी की समेकित रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद होगी।
