सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के 17 पर्सनल असिस्टेंट की नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर लगाई रोक

Supreme Court of India

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए 17 पर्सनल असिस्टेंट (पीए) की नियुक्तियां रद्द कर दी गई थीं। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अपील दायर करने वाले नौ नियुक्त कर्मचारियों को अंतरिम राहत देते हुए उन्हें अगली सुनवाई तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी।

यह विवाद वर्ष 2023 में शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। संशोधित दिशा-निर्देश जारी होने के बाद 7 जून 2023 को मद्रास हाईकोर्ट के पात्र कार्यरत कर्मचारियों से पर्सनल असिस्टेंट के पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 4 अगस्त 2023 को 17 उम्मीदवारों की नियुक्ति की गई थी।

फरवरी 2024 में मद्रास हाईकोर्ट ने भर्ती में कथित अनियमितताओं का स्वतः संज्ञान लिया। इसके बाद न्यायमूर्ति एस. एम. सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति एन. सेंथिलकुमार की खंडपीठ ने 1 जुलाई के अपने फैसले में पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि भर्ती प्रक्रिया मद्रास हाईकोर्ट सेवा नियम, 2015 के नियम 14ए का उल्लंघन करती है।

हाईकोर्ट ने पाया था कि निर्धारित योग्यता न रखने वाले तथा अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके कुछ उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी गई। साथ ही, अनिवार्य कौशल परीक्षा में असफल अभ्यर्थियों को बाद में परीक्षा उत्तीर्ण करने की शर्त पर नियुक्त किया गया और कुछ उम्मीदवारों को अंग्रेजी शॉर्टहैंड की आवश्यक वरिष्ठ श्रेणी योग्यता प्राप्त करने के लिए दो वर्ष का समय दिया गया। फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रतिलेखन परीक्षा के दौरान कुछ उम्मीदवारों को कथित रूप से सहायता मिली और शून्य अंक प्राप्त करने वाले कुछ अभ्यर्थियों का भी चयन कर लिया गया।

हाईकोर्ट ने कहा था कि भर्ती विज्ञापन के माध्यम से पात्रता मानकों में इस प्रकार की छूट देना समानता और निष्पक्षता के सिद्धांतों के विपरीत है। अदालत ने यह भी माना कि भर्ती केवल कार्यरत कर्मचारियों तक सीमित रखने से खुले वर्ग के योग्य उम्मीदवारों को समान अवसर से वंचित किया गया। इसलिए नई भर्ती प्रक्रिया नियमों के अनुसार कराने का निर्देश दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट में अपीलकर्ताओं ने तर्क दिया कि मद्रास हाईकोर्ट सेवा नियम, 2015 के नियम 28 के तहत मुख्य न्यायाधीश को विशेष परिस्थितियों में पात्रता संबंधी शर्तों में छूट देने का अधिकार है। उनका कहना था कि तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने पर्सनल असिस्टेंट की कमी को देखते हुए यह छूट दी थी, साथ ही यह शर्त भी रखी गई थी कि चयनित कर्मचारी दो वर्ष के भीतर आवश्यक योग्यता प्राप्त करेंगे, अन्यथा उन्हें उनके मूल पद पर वापस भेज दिया जाएगा।

अपीलकर्ताओं ने यह भी बताया कि वे अब आवश्यक योग्यता प्राप्त कर चुके हैं और नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब किसी असफल अभ्यर्थी या अन्य प्रभावित व्यक्ति ने नियुक्तियों को चुनौती नहीं दी थी, तब हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर सेवा संबंधी मामले में हस्तक्षेप कैसे किया।

इन दलीलों पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के प्रभाव पर अंतरिम रोक लगा दी और अपीलकर्ताओं को अगली सुनवाई तक अपने पदों पर कार्य जारी रखने की अनुमति दे दी।