छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोरबा नगर निगम के 60 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण के दावे को खारिज करने वाले राज्य सरकार के 12 मई 2020 के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने कहा कि कर्मचारियों के दावों को केवल नियुक्ति की तिथि और सेवा में कथित अंतराल के आधार पर खारिज करना उचित नहीं है।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे वर्ष 1997 से नगर निगम में कार्यरत हैं और 20 से 25 वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे हैं। वहीं, राज्य सरकार ने दावा किया था कि उनकी नियुक्तियां 31 दिसंबर 1997 के बाद हुई थीं तथा सेवा में एक माह से अधिक का अंतराल था, इसलिए वे नियमितीकरण के पात्र नहीं हैं।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक नियमित प्रकृति का कार्य कराने के बाद कर्मचारियों को केवल तकनीकी आधारों पर राहत से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी पाया कि समान परिस्थितियों वाले कुछ अन्य कर्मचारियों के मामलों पर पहले ही सकारात्मक विचार किया जा चुका है, जबकि याचिकाकर्ताओं के साथ अलग व्यवहार किया गया।
अदालत ने राज्य सरकार, नगरीय प्रशासन विभाग और नगर निगम को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ताओं के नियमितीकरण के दावों पर न्यायालय की टिप्पणियों के अनुरूप पुनर्विचार करें और पूरी प्रक्रिया 180 दिनों के भीतर पूरी करें।
