कस्टम विभाग की लापरवाही पर सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण सख्त, आयातक को स्पेशल एडिशनल ड्यूटी रिफंड देने का आदेश

The Rajpatra Law

चेन्नई स्थित सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (CESTAT) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एम/एस केप इलेक्ट्रिक कॉर्पोरेशन के पक्ष में निर्णय देते हुए 18.82 लाख रुपये के स्पेशल एडिशनल ड्यूटी (SAD) रिफंड को मंजूरी दे दी। न्यायाधिकरण ने कहा कि विभाग द्वारा मूल रिकॉर्ड खो दिए जाने के बाद पुनर्निर्मित दस्तावेजों में तकनीकी कमियों के आधार पर रिफंड दावा खारिज नहीं किया जा सकता।

मामला नोटिफिकेशन संख्या 102/2007-कस्टम्स के तहत दाखिल SAD रिफंड दावों से जुड़ा था। कस्टम विभाग ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया था कि कुछ बिक्री चालानों में CENVAT क्रेडिट की गैर-स्वीकृति संबंधी आवश्यक एंडोर्समेंट नहीं था। हालांकि, अपील के दौरान यह सामने आया कि विभाग ने मूल रिफंड फाइलें ही गुम कर दी थीं और बाद में कंपनी से रिकॉर्ड दोबारा प्रस्तुत करने को कहा गया था।

ट्रिब्यूनल ने पाया कि आयात के समय SAD का भुगतान और बाद में VAT/सेल्स टैक्स के साथ वस्तुओं की बिक्री होने का तथ्य विवादित नहीं था। ऐसे में केवल एंडोर्समेंट संबंधी प्रक्रियात्मक कमी के आधार पर रिफंड रोकना उचित नहीं है। न्यायाधिकरण ने कहा, “विभाग स्वयं रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में विफल रहा है, इसलिए उसके कारण उत्पन्न हुई कठिनाइयों का खामियाजा करदाता को नहीं भुगतना चाहिए।”

CESTAT ने यह भी माना कि नोटिफिकेशन का उद्देश्य दोहरे कराधान से राहत देना है और प्रक्रियात्मक त्रुटियों के कारण वैध रिफंड अधिकारों को नकारा नहीं जा सकता। न्यायाधिकरण ने विभाग के आदेशों को रद्द करते हुए रिफंड राशि के साथ Customs Act, 1962 की धारा 27A के तहत वैधानिक ब्याज देने का भी निर्देश दिया।