चार दशक, 10 हजार से अधिक फैसले और न्याय की लंबी यात्रा: आज रिटायर होंगे जस्टिस संजय अग्रवाल

JUSTICE SANJAY AGRAWAL, JUDGE HIGH COURT OF CHHATTISGARH

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल 20 अगस्त 2026 को न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इसके साथ ही करीब चार दशक तक कानून और न्याय व्यवस्था से जुड़े उनके लंबे पेशेवर सफर का एक महत्वपूर्ण अध्याय पूरा होगा। शिक्षक के रूप में करियर शुरू करने से लेकर जिला न्यायालय में वकालत, हाईकोर्ट में प्रैक्टिस, सरकारी अधिवक्ता की जिम्मेदारी और अंततः हाईकोर्ट के न्यायाधीश बनने तक उनकी यात्रा कई महत्वपूर्ण पड़ावों से होकर गुजरी।

न्यायमूर्ति अग्रवाल का जन्म 21 अगस्त 1964 को बिलासपुर में हुआ। उनकी शिक्षा-दीक्षा भी बिलासपुर में हुई और कानून के क्षेत्र में प्रवेश के बाद उनकी पेशेवर पहचान भी इसी शहर और यहां की न्यायिक व्यवस्था से गहराई से जुड़ी रही। बिलासपुर जिला न्यायालय से शुरू हुआ उनका वकालत का सफर आगे चलकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और फिर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तक पहुंचा।

कानून और शिक्षा से जुड़े परिवार में हुआ जन्म

न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल ऐसे परिवार से आते हैं जिसकी पृष्ठभूमि शिक्षा और कानून दोनों क्षेत्रों से जुड़ी रही है। उनके पिता स्वर्गीय श्याम बिहारी अग्रवाल जूलॉजी विभाग में प्रोफेसर रहे, जबकि उनकी माता गृहिणी थीं।

उनके दादा बिलासपुर के प्रसिद्ध सिविल अधिवक्ताओं में शामिल थे। परिवार की इसी कानूनी पृष्ठभूमि ने उनके जीवन में कानून के प्रति शुरुआती जुड़ाव बनाया।

उनके चाचा रविश चंद्र अग्रवाल वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और उन्होंने भी उनके पेशेवर जीवन को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रविश चंद्र अग्रवाल छत्तीसगढ़ के एडवोकेट जनरल रह चुके हैं और वर्तमान में मध्य प्रदेश के एडवोकेट जनरल हैं।

गणित में स्नातक, फिर कानून की पढ़ाई

न्यायमूर्ति अग्रवाल ने बिलासपुर में अपनी स्कूली शिक्षा और स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने गणित विषय से बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने बिलासपुर के कौशलेन्द्र राव लॉ कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई की।

गणित जैसी विश्लेषणात्मक विषय की शिक्षा और उसके बाद कानून की पढ़ाई ने उनके शैक्षणिक सफर को एक अलग स्वरूप दिया। आगे चलकर यही विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण उनके विधिक करियर का भी हिस्सा बना।

शिक्षक के रूप में शुरू हुआ पेशेवर जीवन

कानून की दुनिया में पूर्णकालिक प्रवेश करने से पहले न्यायमूर्ति अग्रवाल ने 1986 से 1989 तक अपर डिवीजन शिक्षक के रूप में कार्य किया।

7 सितंबर 1989 को उन्होंने अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया। इसके बाद उन्होंने अपने चाचा और वरिष्ठ अधिवक्ता रविश चंद्र अग्रवाल के मार्गदर्शन में वकालत शुरू की।

उनके वकालत के शुरुआती वर्ष बिलासपुर जिला न्यायालय में बीते। वर्ष 1989 से जनवरी 1997 तक उन्होंने जिला न्यायालय में प्रैक्टिस की और इसी दौरान उन्हें जमीनी स्तर पर न्यायिक प्रक्रिया और मुकदमों की कार्यवाही को करीब से समझने का व्यापक अवसर मिला।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तक

जनवरी 1997 के बाद न्यायमूर्ति अग्रवाल ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। उन्होंने 1997 से 2000 तक वहां प्रैक्टिस की।

1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के साथ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की स्थापना बिलासपुर में हुई। इसके बाद उन्होंने नवगठित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में वकालत जारी रखी और 2016 में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत होने तक यहां प्रैक्टिस की।

इस तरह उनकी वकालत का बड़ा हिस्सा उस न्यायिक व्यवस्था के विकास के साथ जुड़ा रहा, जिसने बाद में छत्तीसगढ़ की स्वतंत्र न्यायिक पहचान को मजबूत किया।

सिविल कानून रहा प्रमुख विशेषज्ञता क्षेत्र

वकील के रूप में अपने लंबे करियर के दौरान न्यायमूर्ति अग्रवाल ने सिविल, क्रिमिनल और संवैधानिक कानून से जुड़े मामलों में पैरवी की। हालांकि सिविल कानून उनका प्रमुख विशेषज्ञता क्षेत्र रहा।

जिला न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट तक काम करने के कारण उन्हें मुकदमों के विभिन्न चरणों का व्यापक अनुभव मिला। उन्होंने निजी पक्षकारों से जुड़े मामलों के साथ-साथ सरकारी पक्ष की ओर से भी न्यायालय में प्रतिनिधित्व किया।

वह हाईकोर्ट में सरकारी अधिवक्ता के रूप में भी कार्यरत रहे और यह जिम्मेदारी 2007 तक निभाई।

2016 में हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने

करीब 27 वर्षों तक अधिवक्ता के रूप में काम करने के बाद न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल को 29 सितंबर 2016 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

इसके बाद 8 जनवरी 2018 को उन्होंने स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।

यह उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ था। जिस न्यायालय में वह वर्षों तक अधिवक्ता के रूप में मामलों की पैरवी करते रहे, उसी न्यायिक संस्था में उन्हें न्यायनिर्णय की संवैधानिक जिम्मेदारी मिली।

लगभग एक दशक तक हाईकोर्ट में न्यायिक जिम्मेदारी

न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति अग्रवाल ने विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई की। उनके समक्ष सिविल रिवीजन, क्रिमिनल अपील, रिट याचिकाओं सहित कई श्रेणियों के मामले आए।

हाईकोर्ट के विभिन्न रोस्टर में उन्हें अलग-अलग प्रकृति के मामलों की जिम्मेदारी दी जाती रही। उनके कार्यकाल में लंबे समय से लंबित मामलों के साथ-साथ कानून की व्याख्या से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों वाले मामले भी शामिल रहे।

करीब 10 हजार आदेश और फैसले

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल ने अपने न्यायिक कार्यकाल में लगभग 10,000 आदेश और फैसले दिए हैं। इनमें से 1,178 फैसले प्रकाशन के लिए अनुमोदित किए गए हैं।

हालांकि किसी न्यायाधीश के योगदान का मूल्यांकन केवल फैसलों की संख्या से नहीं किया जा सकता। न्यायिक योगदान का वास्तविक महत्व उन कानूनी सिद्धांतों, कानून की व्याख्या और न्यायिक दृष्टिकोण में होता है जो फैसलों के माध्यम से सामने आते हैं।

उनके द्वारा दिए गए प्रकाशित फैसले भविष्य में अधिवक्ताओं, शोधकर्ताओं और न्यायालयों के लिए कानूनी संदर्भ का हिस्सा बने रहेंगे।

बिलासपुर से जुड़ा रहा पूरा सफर

न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल के करियर की सबसे खास बात उनका बिलासपुर से गहरा जुड़ाव रहा है।

यहीं उनका जन्म हुआ, यहीं उनकी शिक्षा हुई, यहीं से उन्होंने जिला न्यायालय में वकालत शुरू की और बाद में इसी शहर में स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अधिवक्ता के रूप में काम किया। वर्ष 2016 में इसी हाईकोर्ट के न्यायाधीश बनने के बाद उनके पेशेवर सफर ने एक नया मुकाम हासिल किया।

इस लिहाज से उनका करियर न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों की कहानी है, बल्कि बिलासपुर में विकसित होती न्यायिक व्यवस्था के साथ जुड़े एक लंबे पेशेवर सफर का भी उदाहरण है।

एक नजर में न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल का सफर

21 अगस्त 1964: बिलासपुर में जन्म।
1986–1989: अपर डिवीजन शिक्षक के रूप में कार्य।
7 सितंबर 1989: अधिवक्ता के रूप में नामांकन।
1989–जनवरी 1997: बिलासपुर जिला न्यायालय में वकालत।
1997–2000: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में प्रैक्टिस।
2000–2016: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में वकालत।
2007 तक: सरकारी अधिवक्ता के रूप में कार्य।
29 सितंबर 2016: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने।
8 जनवरी 2018: स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ।
20 अगस्त 2026: हाईकोर्ट के न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्ति।
सेवानिवृत्ति के साथ खत्म नहीं होगा न्यायिक योगदान

20 अगस्त 2026 न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल के लिए औपचारिक रूप से न्यायिक पद का अंतिम दिन है, लेकिन उनके द्वारा दिए गए फैसले न्यायिक रिकॉर्ड का हिस्सा बने रहेंगे।

करीब चार दशक लंबे इस सफर में उन्होंने कानून के कई महत्वपूर्ण स्तरों को देखा—शिक्षक से अधिवक्ता, जिला न्यायालय के वकील से हाईकोर्ट के अधिवक्ता, सरकारी अधिवक्ता से लेकर हाईकोर्ट के न्यायाधीश तक।

उनका करियर विशेष रूप से इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि इसकी शुरुआत और इसका बड़ा हिस्सा बिलासपुर की कानूनी दुनिया से जुड़ा रहा। आने वाले समय में उनके कार्यकाल का मूल्यांकन उनके फैसलों, उनमें स्थापित कानूनी सिद्धांतों और छत्तीसगढ़ की न्यायिक व्यवस्था में उनके योगदान के आधार पर किया जाएगा।

न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल की सेवानिवृत्ति छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए एक लंबे न्यायिक अध्याय का समापन है। बिलासपुर से शुरू हुई उनकी यह यात्रा अब न्यायिक इतिहास का हिस्सा बन चुकी है।