बिलासपुर, 18 जून। बिलासपुर के उसलापुर रेलवे स्टेशन स्थित गुड्स शेड में श्रमिकों, व्यापारियों और परिवहन से जुड़े लोगों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं, इसकी अब स्वतंत्र जांच कराई जाएगी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान बिलासपुर कलेक्टर द्वारा गठित समिति को स्थल निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। समिति को अपनी रिपोर्ट 13 जुलाई तक अदालत के समक्ष सौंपनी होगी।
मामला रेलवे प्रशासन द्वारा 28 मई को बिलासपुर गुड्स शेड को बंद कर उसकी समस्त गतिविधियां उसलापुर स्थानांतरित किए जाने से जुड़ा है। रेलवे के इस निर्णय को रेलवे कर्मचारी संघ तथा बिलासपुर न्यू गुड्स शेड ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
अवकाशकालीन सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से अदालत को बताया गया था कि उसलापुर गुड्स शेड में 15 दिनों के भीतर सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी। हालांकि, बुधवार को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर शपथपत्र में दावा किया गया कि अब तक स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है और कई जरूरी सुविधाएं अब भी उपलब्ध नहीं हैं।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव और मानस बाजपेयी ने अदालत को बताया कि स्थल पर श्रमिकों और व्यापारियों के लिए विश्राम कक्ष, शौचालय, पेयजल, शेड तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। वहीं रेलवे प्रशासन ने अपने शपथपत्र में दावा किया कि सभी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध करा दी गई हैं।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ए. के. प्रसाद ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता रामाकांत मिश्रा से पूछा कि यदि सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं तो उनके पूर्ण रूप से विकसित होने के बाद ही संचालन शुरू करने में क्या आपत्ति है। अदालत ने बिलासपुर कलेक्टर के उस पत्र का भी उल्लेख किया, जिसमें उर्वरक आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताते हुए सितंबर तक बिलासपुर गुड्स शेड का संचालन जारी रखने का अनुरोध किया गया था।
दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत तथ्यों में विरोधाभास पाए जाने पर हाईकोर्ट ने निष्पक्ष जांच को आवश्यक माना। अदालत ने कलेक्टर की समिति को स्थल निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित की गई है।
