सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केवल बपतिस्मा प्रमाणपत्र (Baptismal Certificate) के आधार पर POCSO मामले में पीड़िता की उम्र साबित नहीं की जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उम्र साबित करने के लिए कानून में निर्धारित दस्तावेजों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
हालांकि, पीड़िता की नाबालिग उम्र साबित न होने के कारण आरोपी को पूरी तरह बरी नहीं किया गया। कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर रेप का अपराध साबित पाया और POCSO की धारा 4 के तहत दोषसिद्धि हटाकर IPC की धारा 376 के तहत 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही धमकी से संबंधित धारा 506 IPC की दोषसिद्धि भी बरकरार रखी।
