चेन्नई: राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की चेन्नई पीठ ने सेंट जॉन फ्रेट सिस्टम्स लिमिटेड की दिवाला कार्यवाही से जुड़े मामले में सिंगापुर स्थित सेंट जॉन लाइन्स पीटीई लिमिटेड की 35 करोड़ रुपये से अधिक की मांग खारिज कर दी। न्यायाधिकरण ने कहा कि यह दावा परिसमापन प्रक्रिया के काफी बाद किया गया और इसके समर्थन में विश्वसनीय दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।
आवेदक कंपनी ने आरोप लगाया था कि परिसमापक ने समुद्री कंटेनरों को वापस नहीं किया, उनके उपयोग से हुई आय का भुगतान नहीं किया और बिल ऑफ लीडिंग का भी अनुचित उपयोग किया। इसके बदले कंपनी ने कंटेनर किराया, उपयोग शुल्क और कंटेनरों की वापसी सहित 35 करोड़ रुपये से अधिक की राहत मांगी थी।
एनसीएलटी ने कहा कि आवेदक का दावा पहले ही रेजोल्यूशन प्रोफेशनल द्वारा अस्वीकार किया जा चुका था और कंपनी का परिसमापन आगे बढ़ चुका है। ऐसे में इस चरण पर नए सिरे से दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायाधिकरण ने यह भी पाया कि आवेदक द्वारा प्रस्तुत एजेंसी समझौते की प्रामाणिकता संदेहास्पद है और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य कॉर्पोरेट देनदार के विरुद्ध किसी वैध दावे को सिद्ध नहीं करते। इसके आधार पर आवेदन खारिज कर दिया गया।
