कोंडागांव में प्रशिक्षु एएसआई को न्यायिक प्रक्रिया और संवेदनशील पुलिसिंग का दिया गया प्रशिक्षण

DLSA Kondagaon Trains Trainee ASIs on Judicial Procedures, Rule of Law and Police Responsibilities 2026

कोंडागांव में मंगलवार को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष खिलावन राम रिगरी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षु सहायक उप निरीक्षकों (एएसआई) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकम प्रताप चंद्रा ने की। इस अवसर पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रेशमा बैरागी पटेल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव गायत्री साय तथा प्रशिक्षु सहायक उप निरीक्षक उपस्थित रहे।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जारी जानकारी के अनुसार बैठक का उद्देश्य प्रशिक्षु अधिकारियों को न्यायिक प्रक्रिया, विधि के शासन, पुलिस प्रशासन की भूमिका तथा न्यायपालिका और पुलिस के बीच समन्वय संबंधी महत्वपूर्ण विषयों से अवगत कराना था।

बैठक को संबोधित करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकम प्रताप चंद्रा ने कहा कि पुलिस विभाग आमजन और न्याय व्यवस्था के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है। उन्होंने बताया कि कानून का प्रभावी क्रियान्वयन, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा तथा समाज में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन निष्ठा, ईमानदारी, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ करने की सलाह दी।

बैठक में अपराध पंजीयन, अनुसंधान की प्रक्रिया, साक्ष्य संकलन, गवाहों की भूमिका, न्यायालयीन कार्यवाही में पुलिस अधिकारियों के दायित्व तथा विभिन्न विधिक प्रावधानों के पालन से जुड़े विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि किसी भी प्रकरण में जांच और साक्ष्य संकलन न्यायिक प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा होते हैं और उनकी गुणवत्ता न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इस दौरान महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों तथा समाज के कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों में विशेष संवेदनशीलता बरतने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि कानून का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि पीड़ितों को न्याय दिलाना और उनके अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।

बैठक के अंत में प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को कानून के क्रियान्वयन, निष्पक्ष जांच, अनुशासन और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करने तथा आमजन के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह दृष्टिकोण अपनाने के निर्देश दिए गए।