बिलासपुर के अनंता स्काई पार्क मामले में खरीदार को राहत, छत्तीसगढ़ रेरा ने ब्याज दावे पर सुनवाई की

RERA - Real Estate Regulatory Authority

छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (छत्तीसगढ़ रेरा) ने बिलासपुर जिले की अनंता स्काई पार्क परियोजना से जुड़े एक महत्वपूर्ण विवाद में घर खरीदारों के अधिकारों को लेकर अहम टिप्पणी की है। प्राधिकरण ने माना कि यदि किसी खरीदार से वर्षों तक राशि लेने के बाद भूखंड का पंजीयन नहीं किया जाता और बाद में केवल मूलधन वापस कर दिया जाता है, तो इससे ब्याज और अन्य वैधानिक दावों का स्वतः अंत नहीं हो जाता। यह आदेश 30 जून 2026 को पारित किया गया।

मामला कोरबा निवासी लावंगी देवी द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार उन्होंने बिलासपुर के बिल्हा स्थित रेरा पंजीकृत परियोजना अनंता स्काई पार्क में प्लॉट क्रमांक-43 खरीदने के लिए वर्ष 2014 से 2017 के बीच विभिन्न किश्तों में कुल 5.40 लाख रुपये का भुगतान किया था। उनका आरोप था कि भुगतान के बावजूद डेवलपर ने न तो विक्रय अनुबंध निष्पादित किया और न ही रजिस्ट्री कराई। बाद में उन्हें बताया गया कि संबंधित प्लॉट किसी तीसरे व्यक्ति को बेच दिया गया है।

शिकायतकर्ता ने रेरा के समक्ष कहा कि उन्होंने कई बार भूखंड की रजिस्ट्री कराने का अनुरोध किया, लेकिन हर बार अलग-अलग आश्वासन दिए गए। अंततः विवाद बढ़ने पर अक्टूबर 2025 में केवल जमा की गई मूल राशि लौटा दी गई, जबकि लंबे समय तक राशि रोके रखने के बावजूद ब्याज का भुगतान नहीं किया गया। उन्होंने रेरा अधिनियम, 2016 के तहत ब्याज और मानसिक एवं आर्थिक क्षति के लिए उचित राहत की मांग की।

दूसरी ओर, परियोजना से जुड़े प्रतिवादियों ने शिकायत का विरोध करते हुए कहा कि एक पक्ष परियोजना का वास्तविक प्रमोटर नहीं है तथा शिकायतकर्ता ने पूरी बिक्री राशि का भुगतान भी नहीं किया था। उनका यह भी कहना था कि चूंकि जमा धनराशि वापस कर दी गई है, इसलिए आगे किसी अतिरिक्त राहत का आधार नहीं बनता।

प्राधिकरण ने मामले की सुनवाई रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 31 तथा छत्तीसगढ़ रेरा नियम, 2017 के तहत की। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के दस्तावेज, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड और कानूनी दलीलों का परीक्षण किया गया। आदेश में यह स्पष्ट किया गया कि ऐसे मामलों में केवल मूलधन लौटाना पर्याप्त नहीं माना जा सकता और ब्याज सहित अन्य वैधानिक अधिकारों पर भी कानून के अनुसार विचार किया जाना आवश्यक है।

यह फैसला उन हजारों खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो रेरा पंजीकृत परियोजनाओं में निवेश के बाद कब्जा, रजिस्ट्री या धनवापसी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। यह आदेश संकेत देता है कि यदि प्रमोटर अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों का पालन नहीं करते हैं, तो खरीदार ब्याज और अन्य कानूनी राहत पाने के लिए रेरा का दरवाजा खटखटा सकते हैं।