अहमदाबाद आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी संपत्ति की बिक्री के लिए रजिस्टर्ड सेल डीड निष्पादित होने के बाद पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) कर की देनदारी केवल इस कारण टाली नहीं जा सकती कि खरीदार ने पूरी राशि बाद में चुकाई हो।
मामला गोधरा निवासी मेहबूब जाबिर पटेल से संबंधित था, जिन्होंने वर्ष 2013 में अपनी भूमि की बिक्री के लिए पंजीकृत बिक्री विलेख किया था। करदाता का दावा था कि खरीदारों द्वारा जारी कुछ चेक बाउंस हो गए थे और अंतिम भुगतान अप्रैल 2015 में प्राप्त हुआ, इसलिए पूंजीगत लाभ को आकलन वर्ष 2016-17 में कर के लिए घोषित किया गया था।
हालांकि, ट्रिब्यूनल ने माना कि 12 अप्रैल 2013 को बिक्री विलेख के पंजीकरण के साथ ही संपत्ति का हस्तांतरण पूरा हो गया था। पीठ ने कहा कि “पंजीकृत बिक्री विलेख पूंजीगत लाभ कराधान के लिए ट्रांसफर को पूर्ण करता है। भुगतान में देरी या राशि की वसूली से जुड़े विवाद कर देनदारी को स्थगित नहीं कर सकते।”
इसके साथ ही ITAT ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संबंधित पूंजीगत लाभ पहले ही आकलन वर्ष 2016-17 में कराधान के लिए शामिल किया जा चुका है, तो करदाता को दोहरे कराधान से बचाने के लिए आयकर विभाग उचित राहत प्रदान करेगा। इस संबंध में आकलन अधिकारी को सत्यापन कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
यह फैसला संपत्ति लेनदेन से जुड़े कर मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्पष्ट होता है कि कराधान के लिए संपत्ति के हस्तांतरण की तिथि का निर्धारण मुख्य रूप से पंजीकृत बिक्री विलेख के आधार पर किया जाएगा, न कि भुगतान की वास्तविक प्राप्ति की तिथि के आधार पर।
