आयकर अपीलीय अधिकरण (आईटीएटी), अहमदाबाद पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी करदाता ने संबंधित आकलन वर्ष में कोई कर-मुक्त (Exempt) आय अर्जित नहीं की है, तो आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 14ए के तहत खर्च की कटौती (Disallowance) नहीं की जा सकती। अधिकरण ने इस सिद्धांत को दोहराते हुए आयकर विभाग की अपील खारिज कर दी और अदाणी टोटल गैस लिमिटेड के पक्ष में पारित आयुक्त (अपील) के आदेश को बरकरार रखा।
यह मामला आकलन वर्ष 2020-21 से जुड़ा है। आयकर विभाग ने राष्ट्रीय फेसलेस अपील केंद्र (NFAC) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें धारा 14ए तथा आयकर नियम, 1962 के नियम 8डी के तहत की गई 2.38 करोड़ रुपये की कटौती को निरस्त कर दिया गया था।
रिकॉर्ड के अनुसार, प्राकृतिक गैस के व्यापार, परिवहन और संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) के निर्माण के व्यवसाय से जुड़ी अदाणी टोटल गैस लिमिटेड के मामले की स्क्रूटनी जांच के दौरान आकलन अधिकारी ने धारा 143(3) सहपठित धारा 144बी के तहत आदेश पारित करते हुए धारा 14ए लागू की और नियम 8डी के आधार पर 2.38 करोड़ रुपये की कटौती कर दी थी। विभाग का तर्क था कि कर-मुक्त आय से संबंधित खर्च को कर योग्य आय से समायोजित नहीं किया जा सकता, इसलिए यह कटौती उचित थी।
कंपनी की ओर से अधिकरण के समक्ष कहा गया कि संबंधित आकलन वर्ष में उसने कोई भी कर-मुक्त आय अर्जित नहीं की थी। ऐसे में धारा 14ए लागू करने का कोई आधार ही नहीं बनता। कंपनी ने इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय, गुजरात उच्च न्यायालय तथा विभिन्न आयकर अपीलीय अधिकरणों के पूर्व निर्णयों का हवाला दिया। साथ ही यह भी दलील दी गई कि वित्त अधिनियम, 2022 के माध्यम से धारा 14ए में जो स्पष्टीकरण जोड़ा गया है, वह केवल आकलन वर्ष 2022-23 से प्रभावी है और उसका पूर्वव्यापी (Retrospective) प्रभाव नहीं है।
अधिकरण ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद कहा कि यह विवाद पहले से ही विभिन्न न्यायालयों द्वारा तय किया जा चुका है। पीठ ने गुजरात उच्च न्यायालय के Corrtech Energy Pvt. Ltd. और PCIT बनाम Adani Wilmar Ltd. सहित अन्य निर्णयों तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुमोदित Chettinad Logistics Pvt. Ltd. मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस वर्ष करदाता को कोई कर-मुक्त आय प्राप्त ही नहीं हुई, उस वर्ष धारा 14ए के तहत खर्च की कटौती नहीं की जा सकती।
अधिकरण ने यह भी माना कि वित्त अधिनियम, 2022 के जरिए धारा 14ए में जो संशोधन किया गया है, वह भविष्य के लिए लागू है और उसे आकलन वर्ष 2020-21 जैसे पुराने मामलों पर लागू नहीं किया जा सकता। इस संबंध में गुवाहाटी उच्च न्यायालय के Williamson Financial Services Ltd. मामले के निर्णय का भी उल्लेख किया गया।
अपने आदेश में अधिकरण ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा, “No exempt income-No disallowance”, अर्थात यदि कर-मुक्त आय ही नहीं है तो धारा 14ए के तहत कोई कटौती भी नहीं की जा सकती। इसी आधार पर अधिकरण ने आयकर विभाग की अपील को खारिज कर दिया।
यह निर्णय उन कंपनियों और करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिनके पुराने आकलन वर्षों में केवल निवेश होने के आधार पर धारा 14ए के तहत खर्च की कटौती की गई थी, जबकि उन्हें संबंधित वर्ष में कोई कर-मुक्त आय प्राप्त नहीं हुई थी। यह फैसला स्पष्ट करता है कि वित्त अधिनियम, 2022 से पहले के मामलों में केवल निवेश के अस्तित्व के आधार पर धारा 14ए लागू नहीं की जा सकती और कर विभाग को न्यायालयों द्वारा स्थापित कानूनी सिद्धांतों का पालन करना होगा।
