नई दिल्ली: आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) की दिल्ली पीठ ने डिमोनेटाइजेशन अवधि में जमा ₹5.60 करोड़ की नकदी को अघोषित आय मानने से इनकार करते हुए करदाता को बड़ी राहत दी है। न्यायाधिकरण ने कहा कि जब नकद जमा राशि का स्रोत ऑडिटेड खातों में दर्ज व्यावसायिक लेनदेन से जुड़ा हो और उसी व्यवसायिक आय को विभाग स्वीकार भी कर चुका हो, तब उसे आयकर अधिनियम की धारा 69A के तहत “अस्पष्टीकृत धन” नहीं माना जा सकता।
मामला दिल्ली के कारोबारी राकेश कुमार से संबंधित था, जिन्होंने दावा किया था कि डिमोनेटाइजेशन से पहले ग्राहकों से सोना खरीदने के लिए नकद अग्रिम प्राप्त हुए थे। बाद में यह राशि बैंक में जमा कर सोना खरीदा गया और ग्राहकों को आपूर्ति की गई। आकलन अधिकारी ने ग्राहकों की पुष्टि और वैट रिकॉर्ड पर संदेह जताते हुए ₹5.60 करोड़ की पूरी राशि को अघोषित आय मान लिया था।
हालांकि ITAT ने पाया कि करदाता ने ऑडिटेड बही-खाते, खरीद रिकॉर्ड, बैंकिंग चैनल से किए गए भुगतान और नकदी प्रवाह का पर्याप्त विवरण प्रस्तुत किया था। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि वैट कानूनों के संभावित उल्लंघन का मुद्दा अलग है और केवल उसी आधार पर आयकर के तहत नकदी जमा को अवैध नहीं ठहराया जा सकता।
न्यायाधिकरण ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि “एक ओर विभाग व्यवसायिक आय को स्वीकार करता है और दूसरी ओर उसी व्यवसाय से प्राप्त नकदी जमा पर संदेह करता है।” इसके साथ ही ₹5.60 करोड़ की पूरी जोड़ (addition) को रद्द कर दिया गया। यह फैसला डिमोनेटाइजेशन से जुड़े लंबित कर विवादों में महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।
