65 दिन की देरी पर खारिज हुई सरकारी अपील, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दी सख्त टिप्पणी

High Court of Chhattisgarh - Bilaspur

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि सरकारी विभाग भी समय-सीमा (Limitation) के नियमों से ऊपर नहीं हैं। अदालत ने महालेखाकार (Accountant General) कार्यालय द्वारा दायर रिट अपील को केवल इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि उसे 65 दिन की देरी से दाखिल किया गया था और देरी का संतोषजनक कारण नहीं बताया गया था।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि अपीलकर्ताओं ने देरी का दिन-प्रतिदिन का विवरण नहीं दिया और न ही कोई पर्याप्त कारण प्रस्तुत किया। ऐसे में देरी माफ करने का कोई आधार नहीं बनता।

अदालत ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के Union of India v. Tarsem Singh और C. Jacob v. Director of Geology and Mining मामलों का हवाला देते हुए कहा कि पुराने और समय-सीमा से बाहर हो चुके दावों को केवल प्रतिनिधित्व या आवेदन देने से पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने दोहराया कि “समय-सीमा से बाधित मामलों को उनके गुण-दोष पर विचार किए बिना भी खारिज किया जा सकता है।”

खंडपीठ ने अंततः 65 दिन की देरी माफ करने की मांग वाली अंतरिम आवेदन (I.A.) को खारिज कर दिया और इसके साथ ही रिट अपील भी समय-सीमा से बाधित होने के कारण निरस्त कर दी। यह फैसला सरकारी विभागों सहित सभी पक्षों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि न्यायालय में समय पर कानूनी कार्रवाई करना अनिवार्य है।