नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर नोटिस जारी किया, जिसमें ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रस्तावित फुट ओवरब्रिज के निर्माण को चुनौती देते हुए मवेशियों के सुरक्षित आवागमन के लिए अंडरपास बनाए जाने की मांग की है। हालांकि, अदालत ने परियोजना के निर्माण कार्य पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि संबंधित प्राधिकरण भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के दिशा-निर्देशों और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों की अनदेखी करते हुए फुट ओवरब्रिज का निर्माण कर रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि परियोजना को पर्याप्त जन परामर्श के बिना आगे बढ़ाया गया है और यह स्थानीय लोगों की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती। उनका दावा था कि संबंधित स्थान दुर्घटना-प्रवण ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित है, जहां वर्षों से कई जानलेवा हादसे हो चुके हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें नियमित रूप से अपने मवेशियों को राष्ट्रीय राजमार्ग के एक ओर से दूसरी ओर ले जाना पड़ता है। ऐसे में मवेशियों के लिए सुरक्षित पारगमन सुविधा न होने के कारण लोगों और पशुओं दोनों की जान को खतरा बना रहता है।
याचिका में यह भी कहा गया कि हाईकोर्ट ने इस आधार पर निर्णय दिया कि वहां पहले से ही एक क्रॉसिंग सुविधा उपलब्ध है, जबकि वास्तविकता में राजमार्ग के दोनों ओर स्थित सड़कों को जोड़ने वाला कोई उचित इंटरसेक्शन मौजूद नहीं है। इसलिए प्रस्तावित फुट ओवरब्रिज स्थानीय निवासियों की समस्याओं का समाधान नहीं कर पाएगा।
याचिकाकर्ताओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के दिशा-निर्देशों का भी हवाला दिया। उनका कहना था कि जिन क्षेत्रों में मवेशियों की आवाजाही नियमित और आवश्यक है, वहां कैटल अंडरपास की व्यवस्था किए जाने का प्रावधान है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने निर्माण कार्य पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की। हालांकि, पीठ ने इस पर सहमति नहीं जताई और कहा कि वह इस स्तर पर राजमार्ग परियोजना में हस्तक्षेप करने के पक्ष में नहीं है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया याचिका में सीमित दम दिखाई देता है और इसे प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज किया जा सकता है।
इसके बावजूद, याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी करने का फैसला किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल निर्माण कार्य पर रोक नहीं लगाई जाएगी, भले ही याचिकाकर्ताओं ने यह तर्क दिया हो कि परियोजना आगे बढ़ने से याचिका निष्प्रभावी हो सकती है।
अदालत ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए मामले को शीघ्र सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
