सुप्रीम कोर्ट ने दृष्टिबाधित युवक और उसकी बुजुर्ग मां के सम्मानजनक जीवन के लिए उठाया कदम, ओडिशा सरकार से मांगी रिपोर्ट

Supreme Court of India

सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के सुबरनपुर जिले के बगाड़िया गांव में रहने वाले जन्म से दृष्टिबाधित जपा भुए और उनकी बुजुर्ग मां राधिका भुए की दयनीय स्थिति पर स्वतः संज्ञान लेते हुए उनके लिए सभी सामाजिक सुरक्षा लाभ, कल्याणकारी योजनाओं का लाभ, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस मामले को दिव्यांग और अत्यंत गरीब नागरिकों के कल्याण से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए ओडिशा सरकार तथा ओडिशा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (OSLSA) से विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट तलब की है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल यह देखना नहीं है कि सरकारी योजनाएं कागजों पर मौजूद हैं या नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका वास्तविक लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंच रहा है और वे सम्मानजनक जीवन जी पा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जपा भुए और उनकी मां अत्यंत खराब परिस्थितियों में एक जर्जर मकान में रह रहे थे, जबकि वे विभिन्न सरकारी योजनाओं के पात्र थे। इस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से उनके लिए उपलब्ध सभी कल्याणकारी योजनाओं और सुविधाओं का विवरण मांगा।

ओडिशा सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राधिका भुए को एक आवास आवंटित किया गया है और जपा भुए के भाइयों को भी आवासीय इकाइयां प्रदान की गई हैं। सरकार ने यह भी कहा कि राधिका भुए को प्रतिमाह 3,500 रुपये वृद्धावस्था पेंशन और जपा भुए को 3,500 रुपये दिव्यांग पेंशन मिल रही है। इसके अलावा उन्हें सरकारी योजना के तहत मुफ्त खाद्यान्न भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दावों का सत्यापन करने और सभी लाभों की वास्तविक स्थिति बताने का निर्देश दिया। अदालत ने राज्य सरकार को अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी के माध्यम से शपथपत्र दाखिल कर यह बताने को कहा कि राधिका भुए को वृद्धावस्था पेंशन नियमित रूप से मिल रही है या नहीं, बकाया राशि का भुगतान हुआ है या नहीं, और उन्हें केंद्र एवं राज्य सरकार की अन्य कौन-कौन सी योजनाओं का लाभ दिया गया है।

इसी प्रकार अदालत ने जपा भुए के लिए उपलब्ध दिव्यांग पेंशन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और अन्य सहायता संबंधी सभी जानकारी भी मांगी है।

जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन करने के लिए अदालत ने ओडिशा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव अरविंद पटनायक को परिवार से व्यक्तिगत रूप से मिलने और उनकी सभी आवश्यकताओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

विधिक सेवा प्राधिकरण को परिवार की रहने की स्थिति, आवास, कल्याणकारी लाभों और अतिरिक्त सहायता की जरूरतों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का भी आदेश दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि जपा भुए या उनकी मां को तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता हो तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मुख्य चिकित्सा अधिकारी के साथ समन्वय कर उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करे।

दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अदालत ने जपा भुए को पैरा-लीगल वॉलंटियर के रूप में नियुक्त करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि वे अन्य दिव्यांग लोगों को उनके कानूनी अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने में मदद कर सकते हैं। साथ ही उन्हें ओडिशा में निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम नहीं होने वाला मानदेय देने का निर्देश भी दिया गया।

पीठ ने प्रथम दृष्टया माना कि जपा भुए अलग आवास के पात्र हो सकते हैं। इसलिए विधिक सेवा प्राधिकरण को उनकी पात्रता की जांच कर राज्य सरकार से आवश्यक सहायता दिलाने के लिए कदम उठाने को कहा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक जपा भुए और उनकी मां को सम्मानजनक जीवन के लिए आवश्यक सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। मामले की अगली सुनवाई जुलाई के तीसरे सप्ताह में होगी, तब तक राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।